महात्मा गांधी के चिंतन और शास्त्री जी की सादगी के आगे देश ही नहीं, पूरी दुनिया आदर से सिर झुकाती है
वाराणसी। महात्मा गांधी जैसा चिंतक, विचारक, सत्य के अन्वेषक, मानवता के पुजारी और जननायक दुनिया में विरले ही पैदा होते हैं। उनके विचारों और आदर्शों के आगे भारत ही नहीं, पूरी दुनिया आदरपूर्वक नतमस्तक होती है। वहीं, आज ही के दिन जन्मे भारत माता के महान सपूत और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी, गांधी जी के विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने वाले उनके सच्चे अनुयायी थे। उनकी सादगी, राजनीतिक शुचिता, सिद्धांतनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम भारतीय राजनीति के लिए आज भी अनुकरणीय हैं।
उक्त विचार आज इंग्लिशिया लाइन स्थित पंडित कमलापति त्रिपाठी फाउंडेशन के कार्यालय में महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए। वरिष्ठ नेता एवं उत्तर प्रदेश राज्य सिंचाई आयोग के पूर्व अध्यक्ष विजय शंकर पांडेय जी की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी का चिंतन और उनके सिद्धांत आने वाली सदियों तक दुनिया को राह दिखाते रहेंगे। सत्य, अहिंसा और प्रेम पर आधारित उनका जीवन-दर्शन अपने आप में एक खुली किताब था। गांधी जी ने सत्य की खोज केवल समाज में ही नहीं, बल्कि अपने जीवन और आचरण में भी निरंतर की। यही उनकी महानता का सबसे विशिष्ट पक्ष था।
वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी किसी एक कालखंड या देश तक सीमित व्यक्तित्व नहीं थे, बल्कि वे मानवता के लिए एक सार्वकालिक प्रेरणास्रोत हैं। उनका जीवन-दर्शन समय और काल की सीमाओं से परे है और आने वाली पीढ़ियों को भी सत्य, अहिंसा, प्रेम तथा मानवीय मूल्यों की राह दिखाता रहेगा। गांधी जी अपने आप में एक संस्था और आदर्शों की ऐसी प्रतिमूर्ति थे, जिनकी प्रासंगिकता कभी समाप्त नहीं हो सकती।
वक्ताओं ने कहा कि भारत माता की गोद में आज ही के दिन जन्मे स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन भी देश और समाज के लिए एक अद्भुत मिसाल है। उन्होंने सादगी, शुचिता, सिद्धांत, आदर्श और उत्कट राष्ट्रप्रेम से सार्वजनिक जीवन के लिए एक ऐसा मापदंड स्थापित किया, जो आज भी प्रेरणा देता है। उनका व्यक्तित्व यह संदेश देता है कि सत्ता और पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और नैतिक मूल्यों का पालन है।
गोष्ठी में यह भी कहा गया कि महात्मा गांधी और शास्त्री जी जैसे महान व्यक्तित्वों के विचारों को समझने और अपने जीवन में उतारने की आज विशेष आवश्यकता है। सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में सिद्धांत, नैतिकता तथा जनसेवा की भावना को मजबूत किए बिना लोकतंत्र की मूल भावना को पूरी तरह साकार नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में जनता का मताधिकार उसकी सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है और उसकी गरिमा एवं स्वतंत्रता की रक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, भारत की पावन धरती से जन्मे इन दोनों महान सपूतों का जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों को सदैव रास्ता दिखाता रहेगा। समाज और देश उनके आदर्शों का कितना अनुसरण कर पाता है, यह हमारे सामूहिक आचरण पर निर्भर है, लेकिन गांधी और शास्त्री जी के विचारों से मिलने वाली प्रेरणा और सत्य की लौ को कभी बुझने नहीं दिया जा सकता।
गोष्ठी से पूर्व महात्मा गांधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।विचार गोष्ठी में प्रमुख रूप से विजय शंकर पांडेय, पूर्व एमएलसी पंडित राजेशपति त्रिपाठी, बैजनाथ सिंह, भूपेंद्र प्रताप सिंह, राधेलाल श्रीवास्तव, प्रभुनाथ पांडेय, डॉ. प्रेम शंकर पांडेय, महेंद्र चौहान, ब्रह्मदेव मिश्रा, ज्वाला मिश्रा, मनोज चौबे, आनंद मिश्रा, पुनीत मिश्रा, राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल,पंकज मिश्रा, सुशील सोनकर, अशोक कुमार पांडेय, कमलाकांत पांडेय, सुवाष राम,युवराज पांडेय, निशांत ओझा,पिंटू शेख आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
