सोनभद्र। खुले सामानों के साथ साथ पैकेट बंद सामानों पर महंगाई की मार पड़ गयी है। एक तो वैसे ही बेतहासा महंगाई के चलते आम जनमानस परेशान है दूसरे कंपनियों की चतुराई का शिकार भी उपभोक्ता हो रहे हैं। अगर महंगाई पर नजर डालें तो पिछले दस वर्षों की तुलना में वर्तमान में समान्य रूप से सारे सामानों की कीमत काफी बढ़ गयी है। खाद्य पदार्थों से लेकर दैनिक उपभोग की सभी वस्तुओं के दाम का असर किसी पर पड़ा है तो वह पैक में बिकने वाले सामान पर है। क्योंकि इन सामानों के दाम लगभग दो गुने हो गया है। संजय, गिरजा, इन्द्र कुमार, मुकेश, नन्दकिशोर, बलिराज, राकेश, मुन्ना, विजय आदि कहना है कि वाशिंग पाउडर, नमकीन, बिस्कुट, नमक, तेल, घी, साबून, मसाला सहित अन्य रोजमर्रा इस्तेमाल किये जाने वाले सामानों के पैकेटों में माल कम होता जा रहा है लेकिन इनके दाम में वृद्धि हो रही है। हालांकि कुछ सामानों के दाम जस के तस ही हैं। उपभोक्ता कंपनियों की इस नीति की मार आम उपभोक्ता पर साफ दिख रही है। गरीब और मध्यम वर्गीय लोग तो इससे अत्यधिक परेशान हैं। इन कंपनियों ने दाम बढ़ाने के मामले में कांन घुमाकर पकड़ने की कहावत को चरितार्थ किया है। इसमें कुछ कंपनियों द्वारा पैक पर अंकित होने वाले मूल्यों को बढ़ाने के बजाय पैक के अन्दर भरे जाने वाले माल को कम करना शुरू कर दिया है। माल कम करने की कवायद इतने छोटे पैमाने पर की गयी कि ग्राहकों को पता ही नहीं चल सका। कंपनियों की यह चाल देर से सही तो क्या अब ग्राहकों के समझ में आने लगी है। इधर कुछ उत्पादक कंपनियां खाद्य पदार्थों के पैकेटों पर माल एक्स्ट्रा (ज्यादा) होने को छपवाकर ग्राहकों को लुभाने का तरीका भी अपनाने लगी हैं। कंपनियों की इस चतुराई और उपभोक्ताओं के हो रहे शोषण पर कोई जिम्मेदार महकमा ध्यान नहीं दे रहा है। शासन-प्रशासन भी आंख पर गांधारी पट्टी बांध मौन बैठा हुआ है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कंपनियों की यदि यहीं चाल अनवरत चलती रही तो उपभोक्ता ठगे जाते रहेंगे।
पैकेटों पर दाम बढ़े पर माल हुए कम, कंपनियों की चतुराई का शिकार हो रहे उपभोक्ता
