रायपुर | हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू), रायपुर के पंचम सेमेस्टर के लेबर लॉ के विद्यार्थियों ने 12 सितम्बर 2026 को भिलाई स्टील प्लांट का इंडस्ट्रियल फील्ड विज़िट किया। इस विज़िट के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की प्रमुख स्टील मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में से एक के कामकाज और संचालन को करीब से समझने का महत्वपूर्ण व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इस शैक्षणिक विज़िट का उद्देश्य विद्यार्थियों को लेबर और इंडस्ट्रियल लॉज़ के व्यावहारिक पहलुओं को समझने तथा क्लासरूम में प्राप्त ज्ञान को औद्योगिक कार्यस्थल की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर प्रदान करना था।
विज़िट के दौरान विद्यार्थियों को स्टील प्रोडक्शन की विभिन्न प्रक्रियाओं से परिचित कराया गया। इसमें रॉ मटेरियल के प्रोसेसिंग से लेकर मैन्युफैक्चरिंग के विभिन्न चरणों तक की जानकारी शामिल थी। प्लांट और उसकी विभिन्न सुविधाओं के गाइडेड टूर के दौरान विद्यार्थियों ने इंडस्ट्रियल प्रोसेसेज़, ऑपरेशंस और वर्कप्लेस प्रैक्टिसेज़ को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा।
विद्यार्थियों ने प्लांट में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भी संवाद किया और उनकी भूमिकाओं, जिम्मेदारियों तथा कार्यानुभवों को लेकर सार्थक चर्चा की। इस संवाद से विद्यार्थियों को एक बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान के कामकाज को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। साथ ही, उन्हें वर्किंग कंडीशन्स, ऑक्युपेशनल सेफ्टी, एम्प्लॉयी वेलफेयर और इंडस्ट्रियल एनवायरनमेंट को करीब से समझने का अवसर मिला।
लॉ स्टूडेंट्स के लिए यह विज़िट विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इससे उन्हें लेबर और इंडस्ट्रियल लॉज़ के व्यावहारिक अनुप्रयोग को समझने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने देखा कि वर्कर्स’ राइट्स, वर्कप्लेस सेफ्टी, वेलफेयर मेज़र्स, एम्प्लॉयर–एम्प्लॉयी रिलेशन्स और इंडस्ट्रियल प्रैक्टिसेज़ से जुड़े कानूनी सिद्धांत वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों में किस प्रकार कार्य करते हैं।
यह विज़िट एचएनएलयू की एक्सपीरिएन्शियल और प्रैक्टिस-ओरिएंटेड लीगल एजुकेशन के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को संस्थानों, कार्यस्थलों और वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़कर कानून और उसके व्यावहारिक अनुप्रयोग की व्यापक समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इस इंडस्ट्रियल विज़िट की संकल्पना और शैक्षणिक रूपरेखा तैयार करने में डॉ. अतुल जयभये, सुश्री गरिमा पंवार और डॉ. शैलेश पांडेय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। फैकल्टी टीम द्वारा तैयार की गई इस पहल ने विद्यार्थियों के एक्सपीरिएन्शियल लर्निंग को समृद्ध किया और उन्हें इंडस्ट्रियल सेटिंग के संदर्भ में कानून को समझने का अवसर प्रदान किया।
