सीआईएसएफ और डीएफआई के मध्य हुआ महत्वपूर्ण समझौता, ड्रोन सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

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बीजपुर/सोनभद्र। देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को उभरते ड्रोन और हवाई खतरों से सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के बीच महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) हुआ है। एनटीपीसी रिहंद सीआईएसएफ के उप कमांडेंट प्रकाश ने बताया कि समझौते के तहत ड्रोन व एंटी-ड्रोन तकनीक, प्रशिक्षण, फोरेंसिक जांच और संयुक्त अभ्यास के माध्यम से सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जाएगा।

सीआईएसएफ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सीआईएसएफ की ओर से डॉ. सी.डी. नायक, डीआईजी एवं प्रिंसिपल एमपी आरटीसी बहरोड़ तथा डीएफआई अध्यक्ष स्मित शाह ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एमओयू के तहत आरटीसी बहरोड़ को ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन सिस्टम के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। संदिग्ध ड्रोन की पहचान, निगरानी, ट्रैकिंग और निष्क्रिय करने की क्षमता बढ़ाने के साथ महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम की तैनाती के लिए एसओपी और पायलट प्रोजेक्ट भी तैयार किए जाएंगे।

सीआईएसएफ के अनुसार अब तक 3000 से अधिक कर्मियों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि करीब 80 इकाइयां ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। संयुक्त ड्रिल, रेड-टीमिंग अभ्यास, फोरेंसिक उपकरण विकास और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत किया जाएगा। सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि बदलते ड्रोन खतरों के बीच यह साझेदारी सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देगी। वहीं डीएफआई अध्यक्ष स्मित शाह ने स्वदेशी ड्रोन तकनीक और नवाचार के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के लिए आत्मनिर्भर सुरक्षा ढांचा विकसित करने में सहयोग की बात कही।

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