खांद्रा कोलियरी बंकोला क्षेत्र में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा एहतियाती सुरक्षा उपाय किए गए

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आसनसोल । ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) ने नीलकंठ मंदिर के निकट सतह पर दरारें/धंसाव देखे जाने के बाद बंकोला क्षेत्र के अंतर्गत खांद्रा कोलियरी में एहतियाती सुरक्षा उपाय प्रारंभ किए हैं। कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों तथा आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

सतह पर दरारें/धंसाव 28 जुलाई 2026 को ऐसे क्षेत्र में देखे गए थे, जहां बड़ी संख्या में अनधिकृत संरचनाएं एवं अवैध रूप से रह रहे लोग मौजूद हैं। ऐसी संरचनाओं की उपस्थिति के कारण प्रभावित क्षेत्र में सतह की प्रभावी भराई का कार्य बाधित हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप भूमिगत खदान कार्यक्षेत्रों में वायु के प्रवेश की संभावना उत्पन्न हो सकती है। इससे प्रभावित क्षेत्र में स्वतः ताप उत्पन्न होने की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

भूमिगत परिस्थितियों में किसी भी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न होने से रोकने तथा अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर ECL ने सतह से खदान को सील करने का निर्णय लिया है। यह एहतियाती कार्रवाई CSIR-CIMFR के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक श्री एन. सहाय तथा ECL के महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं बचाव) के परामर्श एवं तकनीकी मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई है। कार्य ECL की माइंस रेस्क्यू टीम की निगरानी में किया जा रहा है। स्थिति की निरंतर निगरानी की जा रही है तथा विशेषज्ञों की सलाह, तकनीकी आकलन और स्थापित खदान-सुरक्षा प्रथाओं के अनुरूप सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।

भूमिगत कार्यक्षेत्रों में विस्फोट/एयर ब्लास्ट से संबंधित कुछ मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में ECL स्पष्ट करना चाहता है कि वर्तमान में ऐसा कोई परिस्थितिजन्य साक्ष्य अथवा माइन-एयर विश्लेषण रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है, जो खदान में किसी विस्फोट या एयर ब्लास्ट की घटना की पुष्टि करता हो। इसी प्रकार, खदान को “अत्यंत गंभीर रूप से जोखिमपूर्ण” बताए जाने तथा खदान को तीन महीने तक सील रखे जाने संबंधी रिपोर्ट भी इस स्तर पर तथ्यात्मक रूप से स्थापित नहीं हैं। सीलिंग की अवधि तथा खदान को पुनः खोलने के संबंध में निर्णय, तकनीकी निगरानी एवं विशेषज्ञों द्वारा किए गए आकलन के आधार पर उस समय की पर्यावरणीय एवं भूमिगत परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अतः खदान की परिस्थितियों के आधार पर यह अवधि तीन महीने से कम भी हो सकती है।

ECL इस एहतियाती कार्रवाई के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली परिचालन एवं मानव संसाधन संबंधी आवश्यकताओं का भी आकलन कर रहा है। यह स्पष्ट किया जाता है कि फिलहाल मौजूदा कर्मचारियों को परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप उसी खदान की किसी अन्य इकाई अथवा आसपास की अन्य खदानों में उपयुक्त रूप से तैनात किया जाएगा।

ECL यह भी स्पष्ट करता है कि एहतियाती सुरक्षा उपायों के कारण आवासीय क्वार्टरों में वर्तमान जल एवं विद्युत आपूर्ति में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं होगा। उक्त उपाय पूर्णतः निवारक एवं सक्रिय सुरक्षा हस्तक्षेप के रूप में प्रारंभ किए गए हैं। ECL अपने कर्मचारियों तथा आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और तकनीकी आकलन, निरंतर निगरानी तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के आधार पर सभी आवश्यक कदम उठाता रहेगा।

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