गुजरात में वन विभाग ने 1,33,666 हेक्टेयर अवनत (डिग्रेडेड) वन भूमि का पुनरुद्धार किया
गांधीनगर ।पिछले पाँच वर्षों के दौरान गुजरात को राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (नेशनल CAMPA) के तहत 1,226.21 करोड़ रुपये, मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटैट्स एंड टैन्जिबल इनकम (MISHTI) योजना के तहत 67.30 करोड़ रुपये तथा नगर वन योजना के अंतर्गत 7.43 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने 30 जुलाई, 2026 को राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
पिछले पाँच वर्षों में गुजरात में वन क्षेत्र की कुल 1,33,666 हेक्टेयर अवनत (डिग्रेडेड) भूमि का पुनरुद्धार किया गया है। मंत्रालय ग्रीन इंडिया मिशन (GIM), नेशनल CAMPA जैसी योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर अवनत वन क्षेत्रों के पुनर्स्थापन के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इन गतिविधियों में प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा देना, कृत्रिम पुनर्जनन, प्रतिपूरक वनीकरण, मृदा एवं नमी संरक्षण के उपाय तथा स्थानीय पारिस्थितिक परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त स्वदेशी प्रजातियों का रोपण शामिल है।
मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन अनुकूलन निधि (NAFCC) की स्थापना वर्ष 2015 में एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य उन राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में ठोस अनुकूलन गतिविधियों को बढ़ावा देना है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। इस योजना के तहत गुजरात सहित देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 30 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। गुजरात के कच्छ क्षेत्र के लिए “प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित समुदायों के लिए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन: जल एवं आजीविका सुरक्षा तथा पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के माध्यम से लचीलापन सुदृढ़ करना” शीर्षक वाली परियोजना को 21.36 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति प्रदान की गई है।
इसके अतिरिक्त, गुजरात को राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (State Action Plan on Climate Change) की समीक्षा के लिए 12 लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी स्वीकृत की गई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने पिछले पाँच वर्षों के दौरान गुजरात के राज्य जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठ (State Climate Change Cell – SCCC) को भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। लिखित उत्तर में यह भी उल्लेख किया गया है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने “भारत में एक समान रूपरेखा का उपयोग करते हुए अनुकूलन योजना के लिए जलवायु संवेदनशीलता आकलन” शीर्षक से राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन कराया है। यह अध्ययन वर्तमान जलवायु जोखिमों के संदर्भ में राज्यों और जिलों की सापेक्ष संवेदनशीलता का संकेतक-आधारित मूल्यांकन प्रस्तुत करता है तथा सबसे अधिक संवेदनशील राज्यों एवं जिलों तथा उनकी संवेदनशीलता के प्रमुख कारणों की पहचान करता है।
डीएसटी गुजरात के राज्य जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठ को संवेदनशीलता एवं जोखिम आकलन, मानव संसाधन क्षमता निर्माण, जन-जागरूकता कार्यक्रम तथा संस्थागत क्षमता विकास जैसी गतिविधियों के लिए भी सहयोग प्रदान कर रहा है। इस अध्ययन के अनुसार, अन्य निष्कर्षों के साथ यह भी पाया गया है कि गुजरात को ‘मध्यम रूप से संवेदनशील’ (Moderately Vulnerable) राज्य की श्रेणी में रखा गया है।
