गुरु ज्ञान की पूर्णता का ही दूसरा नाम है
शक्तिनगर, सोनभद्र। साहित्यिक, सामाजिक संस्था सोन संगम के तत्वावधान में, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर एनटीपीसी काॅलोनी परिसर, शक्तिनगर में 29 जुलाई, बुधवार की शाम एक विचारगोष्ठी का आयोजन मृत्युंजय सिंह, वरिष्ठ प्राध्यापक, केन्द्रीय विद्यालय की अध्यक्षता एवं राजनाथ दुबे, वरिष्ठ प्रबन्धक, एनसीएल दुधीचुआ के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ गुरु एवं शिष्य के सम्बन्धों पर ओशो के प्रवचनांशों के श्रवण एवं ध्यान से हुआ। अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का संचालन सोन संगम के सचिव डाॅ0 मानिक चन्द पाण्डेय ने किया। विचारगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि राजनाथ दुबे ने कहा कि गुरु तो सभी शिष्यों के लिए एक-सा उपलब्ध है, किन्तु शिष्य अपनी-अपनी पात्रता के अनुरूप गुरु से ज्ञान प्राप्त कर पाते हैं। अध्यक्षता कर रहे मृत्युंजय सिंह ने वर्तमान समय में गुरु एवं शिक्षक की भूमिका को चुनौतीपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि सूचना क्रांति के दौर में ज्ञान देने से अधिक महत्वपूर्ण शिष्यों को यह सिखाना है कि ज्ञानार्जन कैसे किया जाए। वरिष्ठ प्राध्यापक चन्द्रशेखर जोशी ने कहा कि सूचना संकलन और ज्ञानार्जन एकदम भिन्न बातें हैं। सूचना तो इण्टरनेट और एआई से भी मिल जाती है, पर ज्ञान केवल गुरु ही दे सकता है। डाॅ0 मानिक चन्द पाण्डेय ने कहा कि गुरु ज्ञान की पूर्णता का ही दूसरा नाम है, इसीलिए गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। डाॅ0 योगेन्द्र मिश्र ने कहा कि गुरु, शिष्य को बुद्धि से मेधा, मेधा से प्रज्ञा और प्रज्ञा से चेतना की यात्रा पर ले जाता है। उक्त अवसर पर अच्छेलाल, करुणा, गौतमी, समिधा सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सोन संगम के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय दुबे द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
