एनटीपीसी तालचेर-कनिहा टाउनशिप में भक्ति और आस्था के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा

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तालचेर। एनटीपीसी तालचेर-कनिहा की दीपशिखा टाउनशिप में 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। बारिश के बावजूद आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन और रथ खींचने के लिए पहुंचे। सुबह पारंपरिक पाहंडी अनुष्ठान के तहत भगवान की प्रतिमाओं को मंदिर से विधिवत रथ पर विराजमान कराया गया। इसके बाद शाम को मुख्य मंदिर परिसर से रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। रथयात्रा से पहले छेरा पहनहरा की पारंपरिक रस्म का निर्वहन एनटीपीसी तालचेर-कणिहा के परियोजना प्रमुख अजय सिंह यादव ने किया।

जैसे-जैसे रथ आगे बढ़ता गया, श्रद्धालु “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ रथ खींचते रहे। पूरा वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। रथ श्री गुंडिचा (मौसीमा) मंदिर पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। शाम को आयोजित भजन संध्या में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और देर रात तक भक्ति संगीत की मधुर स्वर लहरियां गूंजती रहीं।

रथयात्रा महोत्सव के अवसर पर एनटीपीसी कनिहा परिसर में लगभग 60 स्टॉल लगाए गए हैं, जो 24 जुलाई को होने वाली बहुड़ा यात्रा तक संचालित रहेंगे। इन स्टॉलों पर संबलपुरी साड़ियां, रेडीमेड वस्त्र, हस्तनिर्मित कालीन, फर्नीचर, गृह सज्जा की वस्तुएं तथा कंधमाल क्षेत्र के जैविक मसाले उपलब्ध हैं। स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को भी अपने उत्पाद प्रदर्शित एवं बिक्री के लिए विशेष स्थान उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा घर के बने अचार, नमकीन, पीतल की सजावटी वस्तुएं, सिरेमिक उत्पाद तथा तेंदू पत्तों से बनी हस्तनिर्मित अगरबत्तियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। रथयात्रा समिति एवं एनटीपीसी परिवार ने आयोजन की सफलता के लिए समिति के सदस्यों, लेडीज क्लब, कर्मचारियों, उनके परिवारों, सीआईएसएफ, टाउनशिप सुरक्षा कर्मियों, सेवायतों, स्वयंसेवकों तथा सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बना।

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