वाराणसी। एनजीटी द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन और वाराणसी में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों के संबंध में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी),प्रधान न्यायपीठ,नई दिल्ली के माननीय सदस्य/न्यायाधीश डॉ. अफरोज अहमद की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक संपन्न हुई।उन्होंने नदी संरक्षण,ग्रीन बेल्ट विकसित करने,आम नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने,पर्यावरण संरक्षण,सीवरेज ट्रीटमेंट और भविष्य की कार्य योजना तथा विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े कार्यों के बारे में विस्तार से संबंधित विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
उन्होंने सीएमओ से कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट के आंकलन और निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करें। ये सुनिश्चित करें कि हॉस्पिटल में 48 घंटे से ज्यादा समय तक बायोमेडिकल वेस्ट न रहे।ई-वेस्ट के निस्तारण के लिए यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी को निर्देशित किया कि कोई रीसाइक्लर या खरीदार मिल जाए तो ठीक होगा।ई-वेस्ट के संबंध में लोगों को जागरूक करने की भी आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि जो भी सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की शर्तें हैं उनका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने सीवरेज के पानी का उपयोग कृषि, लैंडस्केपिंग व बागवानी और निर्माण कार्य सहित अन्य कार्यों में करने का निर्देश दिया।उन्होंने डीएफओ से कहा कि 100-200 वर्ष के पुराने वृक्षों को संरक्षित रखने वाले लोगों को प्रोत्साहित किया जाए।साथ ही किसानो को खेत के मेढ़ों पर पौधे लगाने के लिए जागरूक करने के साथ एग्रो फारेस्ट्री के प्रोत्साहन पर जोर दिया।उन्होंने जिला कृषि अधिकारी को गंगा नदी के किनारे बसे किसानों को कीटनाशक दवाओं के कम उपयोग के लिए,वृक्षारोपण करने व खेतों की अच्छी तरह से मेढ़बंदी कराने हेतु जागरूक करने के निर्देश दिए।इसमें केवीके(कृषि विज्ञान केंद्र) सहित एटीएम(असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर)और बीटीएम(ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर)की सहायता ली जाए।उन्होंने कहा कि बायोडिग्रेडेबल वेस्ट से अधिक से अधिक कम्पोस्ट खाद बनाया जाए।ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए बेहतर कार्य किया जाए ताकि ग्राउंड वाटर क्रिटिकल जोन में न जाने पाए।नालों के अगल बगल बृहद तरीके से वृक्षारोपण किया जाए।सीवरेज ट्रीटमेंट के कार्य संबंधी योजना में जो गैप है उसके लिए डीपीआर/प्रपोजल/प्रोजेक्ट बनाकर तैयार रखें, ताकि शत प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित हो सके।ग्राम पंचायतों की सरकारी भूमि पर बायोडायवर्सिटी वन विकसित करने के निर्देश दिए गए।इसमें मुख्य रूप से जामुन,अर्जुन और इमली के पौधे लगाए जाएँ।पर्यावरण संरक्षण के छोटे मोटे कार्यों के लिए सीएसआर फण्ड की भी सहायता ली जाए।
सर्किट हाउस सभागार में आयोजित बैठक में डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से जुड़े हैं तथा सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।उन्होंने नदियों के बाढ़ क्षेत्र का चिन्हीकरण करने, नदी जलागम क्षेत्रों में अधिक पौधारोपण करने तथा सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदियों के संरक्षण के लिए उनके जलागम क्षेत्रों में वन क्षेत्र का विस्तार जरूरी है।
बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने जिले में विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन एवं निस्तारण,नदी संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने नगर निगम क्षेत्र के सभी वार्डों में डोर टु डोर कूड़ा कलेक्शन व विभिन्न अपशिष्ट का पृथक्करण और निस्तारण संबंधी विषयों की जानकारी दी।साथ ही पुराने और अनुपचारित कचरे के वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से निपटान के बारे में बताया।डॉ. अफरोज अहमद ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन के कार्यों की सराहना की और इन्हें निरंतर जारी रखने पर जोर दिया।उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को जिला प्रशासन का सहयोग करने और बनारस को खूबसूरत शहर बनाने के लिए डेडिकेटेड होकर कार्य करने पर प्रशंसा व्यक्त की।मीटिंग की समाप्ति पर उन्होंने सर्किट हाऊस परिसर में सिंदूर और जिलाधिकारी ने आम का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।इस बैठक में सीडीओ प्रखर कुमार सिंह,डीएफओ स्वाति सिंह,वीसी वीडीए पूर्ण बोहरा सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
