राउरकेला।सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के इस्पात जनरल अस्पताल (आईजीएच), हर साल की नाई 8 मई को मनाए जाने वाले विश्व थैलेसीमिया दिवस के मौके पर, एक बार फिर थैलेसीमिया और हीमोग्लोबिन से जुड़ी दूसरी बीमारियों के खिलाफ जंग में उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। इसकी वजह हैं इसकी अत्याधुनिक जाँच सुविधाएँ और समर्पित चिकित्सा विशेषज्ञता।
थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन ने इस साल की विषय वस्तु ‘पहुंच, समानता और गुणवत्तापूर्ण देखभाल के लिए मिलकर काम करना” (Together for access, equity and quality care) घोषित की है। इसका मुख्य ज़ोर यह सुनिश्चित करने पर है कि किसी भी मरीज़ को भौगोलिक या आर्थिक रुकावटों की वजह से समय पर जाँच और इलाज से वंचित न रहना पड़े एक ऐसा लक्ष्य जिसे आईजीएच इस क्षेत्र के लोगों के लिए लगातार पूरा करता आ रहा है।
उन्नत एचपीएलसी (हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी) टेस्टिंग से लैस आईजीएच, जो हीमोग्लोबिन के अलग-अलग प्रकारों की पहचान करने के सबसे सटीक और संवेदनशील तरीकों में से एक है, हर साल लगभग 400 एचपीएलसी टेस्ट करता है। इसके ज़रिए यह हीमोग्लोबिन से जुड़ी विभिन्न बीमारियों (हीमोग्लोबिनोपैथी) के लगभग 150 मामलों का सफलतापूर्वक पता लगाता है, जिससे समय पर चिकित्सा मदद मिल पाती है और मरीज़ों की बेहतर देखभाल हो पाती है। जाँच से भी आगे बढ़कर, आईजीएच मरीज़ों और उनके परिवारों को ज़रूरी परामर्श सेवाएँ भी देता है। यह उन्हें जागरूकता, बचाव से जुड़े सुझाव और सोच-समझकर फैसले लेने की क्षमता प्रदान कर सशक्त बनाता है। अपनी उन्नत जाँच क्षमताओं और मरीज़-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ, इस्पात जनरल हॉस्पिटल ने थैलेसीमिया की पहचान और देखभाल के लिए खुद को एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थान के रूप में स्थापित किया है। इसका लाभ न केवल सेल के कर्मचारियों और उनके आश्रितों को मिलता है, बल्कि पश्चिमी ओडिशा और आस-पास के क्षेत्रों की बड़ी आबादी को भी इसका फायदा पहुँचता है। इस तरह, इसने एक सच्ची ‘क्षेत्रीय जीवनरेखा’ के तौर पर अपनी प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया है।
