समय पर सर्वे नहीं किया गया, तो सभी 4,764 लंबित दावों का भुगतान किसानों को सुनिश्चित किया जाए -जिलाधिकारी

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डीएम की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा बैठक सम्पन्न

सोनभद्र। जिलाधिकारी बी0एन0 सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित जनसुनवाई कक्ष में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने एसबीआई जनरल इन्स्योरेन्स कंपनी के प्रतिनिधि को निर्देशित किया कि किसानों को फसल क्षति की क्षतिपूर्ति अधिकतम 10 कार्य दिवस के भीतर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पात्रता की श्रेणी में आने वाले प्रत्येक किसान को समयबद्ध तरीके से मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
उप कृषि निदेशक, सोनभद्र ने जानकारी दी कि खरीफ वर्ष 2025 में जनपद के 19,080 किसानों ने फसल बीमा कराया था। इसके अंतर्गत व्यक्तिगत एवं क्रॉप कटिंग के आधार पर 6,425 किसानों को कुल 826.98 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। शेष 151.00 लाख रुपये की धनराशि आधार आधारित प्रक्रिया के कारण लंबित है, जो प्रक्रियाधीन है। उन्होंने बताया कि खरीफ 2025 में असामयिक वर्षा एवं ओलावृष्टि के कारण कुल 11,483 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 8,432 आवेदन पात्र पाए गए और उनका भुगतान किया गया, जबकि 3,051 आवेदन अपात्रता के कारण निरस्त किए गए। जिलाधिकारी ने बीमा कंपनी से किसानों के लिए शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी ली। इस पर बताया गया कि किसान व्यक्तिगत क्षति की स्थिति में भारत सरकार के टोल फ्री नंबर 14447 पर 72 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
जिलाधिकारी ने लंबित दावों के सर्वे में देरी पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि यदि समय पर सर्वे नहीं किया गया, तो सभी 4,764 लंबित दावों का भुगतान किसानों को सुनिश्चित किया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि खरीफ 2024 की तुलना में खरीफ 2025 में 5,000 से अधिक अतिरिक्त किसानों ने बीमा कराया है। जिलाधिकारी ने अग्रणी जिला प्रबंधक, इंडियन बैंक को निर्देश दिया कि खरीफ 2026 में अधिक से अधिक केसीसी धारक किसानों का बीमा कराया जाए तथा उनका डाटा प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल पर समय से अपलोड किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर डाटा फीडिंग न होने पर संबंधित बैंक जिम्मेदार होगा। जिलाधिकारी ने बीमा कंपनी को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर किसान पाठशालाओं, पंपलेट वितरण, बाइक रैली आदि के माध्यम से योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान योजना का लाभ उठा सकें।

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