टीबी उन्मूलन की दिशा में एनटीपीसी कहलगांव की पहल : 500 मरीजों को पोषण किट का वितरण

भागलपुर। टीबी मुक्त भारत अभियान को सशक्त बनाने की दिशा में एनटीपीसी कहलगांव ने एक महत्वपूर्ण एवं अनुकरणीय पहल की है। अपनी नैगमिक सामाजिक उत्तरदायित्व योजना के अंतर्गत एनटीपीसी जीवन ज्योति चिकित्सालय के सहयोग से एनटीपीसी कहलगांव द्वारा भागलपुर जिले के 500 टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण आहार किट का वितरण किया गया, ताकि उपचार के दौरान आवश्यक पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा सके एवं उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ को सुनिश्चित किया जा सके। इस पहल के तहत चयनित टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार किट प्रदान की जाएगी, जिससे उनके स्वास्थ्य स्तर में सुधार, दवाओं की प्रभावशीलता में वृद्धि तथा उपचार की सफलता दर को बढ़ावा मिलेगा। यह प्रयास भारत सरकार के टीबी मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप है और सामुदायिक स्वास्थ्य सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी कदम के रूप में उभरकर सामने आया है।

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इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ एनटीपीसी कहलगांव के परियोजना प्रमुख  रवीन्द्र पटेल द्वारा जीवन ज्योति चिकित्सालय परिसर में किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में  रवीन्द्र पटेल ने कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी के उपचार में दवाओं के साथ-साथ संतुलित एवं पौष्टिक आहार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि एनटीपीसी समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए स्वास्थ्य एवं जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में निरंतर सक्रिय योगदान देता रहेगा।  कार्यक्रम में महाप्रबंधक (मेंटेनेंस एवं ऐश डाइक प्रबंधन) नाथ मरिशेट्टी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुष्मिता सिंह, अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन) मनोरंजन सारंगी सहित एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर जिला राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के प्रतिनिधि दिनानाथ, विकास कुमार, राज्य कार्यक्रम अधिकारी – निक्षय मित्र, तथा राज्य एवं जिला स्तर के स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।  उपस्थित सभी टीबी मरीजों ने इस कल्याणकारी पहल के लिए एनटीपीसी प्रबंधन के प्रति आभार व्यक्त किया।

एनटीपीसी कहलगांव द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल सामाजिक दायित्वों के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि सार्वजनिक–निजी सहभागिता के माध्यम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य लक्ष्यों की प्राप्ति में भी एक महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध होगा। यह पहल भविष्य में अन्य संस्थानों को भी टीबी उन्मूलन अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी।

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