जलेसर, एटा। ब्रज मंडल की ड्योढ़ी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले जलेसर नगर ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। नगर पालिका परिषद जलेसर की ओर से नगर की प्राचीन पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को सम्मान देने तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित कराने के उद्देश्य से प्राचीन किले के खंडहरों के समीप 60 फीट ऊंचा तिरंगा स्थापित कर शान से फहराया गया। विशाल तिरंगे के लहराने से पूरा क्षेत्र देशभक्ति के रंग में रंग गया और जलेसरवासियों ने गौरव की अनुभूति की।

नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती गौरी वर्मा एवं समस्त सभासदों के सहयोग से आयोजित इस पहल को नगर की ऐतिहासिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में नगरवासियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और प्राचीन किले की धरोहर को संरक्षित किए जाने की पहल की सराहना की। अधिशासी अधिकारी प्रद्युम्न कुमार के कुशल नेतृत्व एवं दिशा-निर्देशन में जलेसर की प्राचीन धरोहरों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और हरित क्षेत्र विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। प्राचीन किले के खंडहरों को संजोने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र को विकसित कर ऐसा स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे जलेसर की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान मिल सके।
‘घुंघरू घंटी नगरी जलेसर’ के नाम से प्रसिद्ध यह नगर धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। नगर की प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के साथ उन्हें पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। किले पर स्थित प्राचीन जलेश्वर मंदिर के संरक्षण तथा उसके आसपास के क्षेत्र के विकास की योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही सागर ताल को भी पर्यावरणीय दृष्टि से विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सागर ताल के आसपास बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि भविष्य में यह क्षेत्र देश-विदेश से आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा सके। इससे जलेसर में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ पर्यावरण एवं पक्षी पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अधिशासी अधिकारी प्रद्युम्न कुमार का कहना है कि आधुनिक शहरी विकास का उद्देश्य केवल सड़क, नाली और भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का संरक्षण भी विकास का अभिन्न हिस्सा है। इसी सोच के साथ जलेसर की प्राचीन धरोहरों को संरक्षित करने और हरित क्षेत्र विकसित करने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं।
नगर में चल रहे इन प्रयासों को आम जनमानस का भी समर्थन मिल रहा है। नागरिकों का मानना है कि यदि जलेसर की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक विरासत को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो यह नगर आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना सकता है। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्राचीन किले की पृष्ठभूमि में 60 फीट ऊंचे तिरंगे का फहराया जाना इसी गौरवशाली विरासत को राष्ट्रप्रेम से जोड़ने का प्रतीक बना। जलेसर के लोगों के लिए यह केवल एक तिरंगा स्थापित किए जाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक जड़ों, सांस्कृतिक पहचान और उज्ज्वल भविष्य के प्रति संकल्प का भी अवसर रहा।
