सांक्टोरिया । ईसीएल के जनसंपर्क अधिकारी द्वारा जानकारी दी गई कि उच्च न्यायालय ने ईसीएल आवासों के अनधिकृत कब्जाधारियों के विरुद्ध पूर्व निर्देशों को बरकरार रखा। दिनांक 01.04.2026 को Eastern Coalfields Limited (ईसीएल) के पक्ष में दिए गए दो निर्णयों की श्रृंखला में, माननीय न्यायालय ने पुनः निर्देशित किया है कि कंपनी के आवासों पर अनधिकृत रूप से कब्जा करने वाले व्यक्तियों को किराया अदा करना होगा तथा कंपनी को उक्त राशि को ग्रेच्युटी से समायोजित करने का अधिकार होगा। यह निर्णय सेवानिवृत्ति के पश्चात कंपनी आवासों पर अनधिकृत कब्जे के विरुद्ध एक स्पष्ट और सशक्त संदेश देता है तथा सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में जवाबदेही को सुदृढ़ करता है। ईसीएल ने दिनांक 09 अप्रैल 2026 को Calcutta High Court द्वारा WPA 7593 of 2026, WPA 7595 of 2026 तथा WPA 7598 of 2026 (प्रकरण: Eastern Coalfields Limited बनाम Union of India एवं अन्य), जो ईसीएल मुख्यालय के पूर्व कर्मचारियों से संबंधित हैं, में दिए गए स्पष्ट एवं ठोस निर्णय का स्वागत किया है।
सीआईएल नीति ढांचे के अनुरूप
माननीय न्यायालय का यह निर्णय Coal India Limited के परिपत्र संख्या CIL:D(P&IR):SECH:005:144:133 दिनांक 11 नवंबर 2021 के अनुरूप है, जिसके माध्यम से कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी सभी अनुषंगी कंपनियों, जिनमें ईसीएल भी शामिल है, को सेवानिवृत्ति के पश्चात कंपनी आवासों को समय पर खाली कराने हेतु आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
उक्त निर्णय के माध्यम से न्यायालय ने पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए ईसीएल के इस पक्ष को स्वीकार किया कि कंपनी आवास के अनधिकृत उपयोग से उत्पन्न देय राशि सरकारी देयता की श्रेणी में आती है तथा इसे संबंधित कर्मचारी के सेवानिवृत्ति लाभों, जिसमें ग्रेच्युटी भी शामिल है, से विधिसम्मत रूप से समायोजित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, माननीय न्यायालय ने निर्देश दिया कि आवास खाली करने के उपरांत, पूर्व कर्मचारियों से वसूल की जाने वाली सभी बकाया देय राशि को उनकी ग्रेच्युटी से काट लिया जाए तथा शेष राशि, यदि कोई हो, 15 दिनों के भीतर संबंधित पूर्व कर्मचारियों को जारी की जाए।
सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग के विरुद्ध सशक्त संदेश
न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि ऐसे अनधिकृत आचरण को सहन किया गया या प्रोत्साहित किया गया, तो इससे अन्य व्यक्तियों को भी इसी प्रकार कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी, जिससे ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि सेवा में कार्यरत एवं पात्र कर्मचारियों को कंपनी आवास उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। यह टिप्पणी ऐसे कृत्यों के व्यापक संस्थागत प्रभाव को रेखांकित करती है तथा कंपनी के सीमित आवास संसाधनों के आवंटन में अनुशासन एवं निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता को सुदृढ़ करती है।
सेवारत कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा
यह निर्णय केवल कुछ मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कठिन खनन परिस्थितियों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति एक व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रत्येक कंपनी आवास एक सेवारत कर्मचारी एवं उसके परिवार के लिए एक घर का प्रतिनिधित्व करता है, और सेवानिवृत्ति के पश्चात अनधिकृत कब्जा उन कर्मचारियों को सीधे प्रभावित करता है जो इस आवश्यक सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
