बलिदान दिवस पर वीरांगना लक्ष्मीबाई को किया गया याद

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 बाराबंकी। मैं किसी भी कीमत पर झाँसी की सम्प्रभुता पर आँच नहीं आने दूँगी। मैं अपनी झाँसी की रक्षा स्वयं करूँगी।  यह डायलॉग हैं नाटक, वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई के। जो कि तैयार किया जा रहा बहार सुगम संगीत प्रभाग अकेडमी पीरबटावन की नाट्य कार्यशाला में। यह नाट्य कार्यशाला संगीत नाटक अकेडमी लखनऊ की तरफ से चंद्रभाष सिंह के निर्देशन में 13 जून से चल रही है। 

संयोग है कि कार्यशाला के दौरान वीरांगना लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस मनाया गया। संबोधन देते हुए नाटक निर्देशक चंद्रभास सिंह ने कहा कि दूल्हाजू और मीर ने धोखा नहीं दिया होता तो 1857 की जंगे आजादी की तस्वीर दूसरी होती तथा रानी का बलिदान नहीं होता। हम जब भी हारे हैं भेदियों का कारण हारे हैं।

 अध्यक्षीय संबोधन में प्रदीप सारंग ने कहा कि झाँसी रानी को याद करते हुए उनके महिला जागरूकता और सशक्तिकरण सम्बन्धी किये गए कर्मों की चर्चा जरूरी है। महिलाओं की सैन्य टुकड़ी के गठन और प्रशिक्षण इनके विशेष रहे हैं। इस अवसर पर शायर एवं अभिनेता आदर्श गुलसिया ने कहा कि झाँसी रानी की वीरता एक मिसाल है। बचपन से ही बिना भेदभाव तीर तलवार घुड़सवारी इत्यादि के अवसर पाने के कारण छबीली राजगद्दी संभालने के योग्य बन सकी।

         आगामी 28 जून को होने जा रहे मंचन में

चमकेगा बाराबंकी का रंगकर्म। रानी लक्ष्मीबाई के किरदार में दिखेंगी मलक बुशरा तो झलकारी बाई के किरदार में रंग बिखेरेंगी श्रेया श्रीवास्तव। जहाँ मनु के किरदार में प्राख्या श्रीवास्तव अभिनय करेंगी तो वहीं राव के किरदार में शौर्य मिश्रा दिखाएंगे हुनर। मुरादखान के किरदार में मो अयान, मोरोपंत के किरदार में रजत बहादुर वर्मा, श्रीमंत के किरदार में आदर्श गुलसिया, तात्या दीक्षित के किरदार में प्रदीप सारंग, सैनिक के किरदार में युग शर्मा, आर्या के किरदार में शुभांगी वर्मा का अभिनय नाटक को ऊंचाईयों तक पहुँचा रहा है। इसके अतिरिक्त विनोद कुमार चौधरी, साद, अंशिका रस्तोगी, प्राची रस्तोगी, श्रेया श्रीवास्तव, मोहम्मद अयान भी किरदार निभा रहे हैं। मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी, किसी भी कीमत पर , झाँसी की संप्रभुता पर आँच नहीं आने दूँगी, मैं अपनी झाँसी की रक्षा स्वयं करूँगी – वीरांगना लक्ष्मीबाई

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