एनटीपीसी सिंगरौली में ‘लोकतंत्र, मीडिया और हिंदी’ तथा ‘स्वच्छता में सहभागिता’ पर विचार गोष्ठी आयोजित

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शक्तिनगर, सोनभद्र। एनटीपीसी सिंगरौली में हिंदी पखवाड़ा–2026 के अंतर्गत ‘लोकतंत्र, मीडिया और हिंदी’ तथा ‘स्वच्छता में सहभागिता’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में क्षेत्र के मीडिया प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, एनटीपीसी के अधिकारियों के साथ केंद्रीय विद्यालय, शक्तिनगर की विशेष सहभागिता रही। कार्यक्रम में लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया और हिंदी की भूमिका तथा स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने के विविध पहलुओं पर सार्थक विमर्श हुआ। गोष्ठी में इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि हिंदी केवल कार्यालयीन कामकाज अथवा अभिव्यक्ति की भाषा नहीं, बल्कि देश के विशाल जनसमुदाय के बीच संवाद, विचार और संवेदना का सशक्त माध्यम है। अपनी सहजता, व्यापकता और संप्रेषणीयता के कारण हिंदी शासन-प्रशासन, मीडिया और आम नागरिक के बीच संवाद की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभागीदारी तभी अधिक प्रभावी हो सकती है, जब सूचनाएँ ऐसी भाषा में उपलब्ध हों जो आम नागरिक तक सरलता से पहुँचे और उसे अपनी बात अभिव्यक्त करने का समान अवसर प्रदान करे।

विशिष्ट अतिथि डॉ. छोटे लाल जायसवाल ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में स्वतंत्र, जिम्मेदार एवं संवेदनशील मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। मीडिया केवल सूचनाओं के प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था के बीच संवाद का प्रभावी सेतु है। उन्होंने कहा कि हिंदी ने पत्रकारिता को व्यापक सामाजिक आधार प्रदान किया है और जनसरोकारों को देश के बड़े वर्ग तक पहुँचाने में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। डिजिटल मीडिया के तेजी से विस्तार के वर्तमान दौर में भी हिंदी ने नई तकनीक और नए संचार माध्यमों के अनुरूप स्वयं को विकसित किया है। आवश्यकता है कि मीडिया में हिंदी का प्रयोग सरल, तथ्यपरक, गरिमापूर्ण और जनसुलभ हो। उन्होंने कहा कि भाषा की सार्थकता केवल उसके अधिकाधिक प्रयोग में नहीं, बल्कि इस बात में भी निहित है कि वह जनमानस की आकांक्षाओं, समस्याओं और विचारों को कितनी प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करती है। इस दृष्टि से हिंदी लोकतांत्रिक संवाद को व्यापक बनाने वाली महत्वपूर्ण भाषा है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. विनोद पांडेय ने ‘स्वच्छता में सहभागिता’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वच्छता को केवल किसी संस्था अथवा अभियान का दायित्व मानने के बजाय इसे व्यक्तिगत व्यवहार और सामूहिक सामाजिक उत्तरदायित्व का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने स्वच्छ परिसर, अपशिष्ट के जिम्मेदार निस्तारण, सार्वजनिक स्थलों के प्रति संवेदनशीलता तथा स्वच्छता संबंधी जागरूकता में नागरिक सहभागिता की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता तभी स्थायी सामाजिक संस्कार का रूप ले सकती है, जब प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को उसका सक्रिय सहभागी माने। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. ओम प्रकाश, उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन/राजभाषा), एनटीपीसी सिंगरौली ने कहा कि “लोकतंत्र, मीडिया और हिंदी—तीनों के मूल में संवाद और जनभागीदारी की भावना निहित है। हिंदी इस संवाद को व्यापकता, सहजता और आत्मीयता प्रदान करती है।” उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी एवं बहुसांस्कृतिक देश में हिंदी ने विभिन्न भाषायी समुदायों के बीच संपर्क और संवाद की भाषा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विचार गोष्ठी की विशेषता क्षेत्र के मीडिया कर्मियों की सक्रिय सहभागिता रही। मीडिया प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बदलते मीडिया परिदृश्य, डिजिटल एवं सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, समाचारों की विश्वसनीयता, तथ्यपरक पत्रकारिता, स्थानीय मुद्दों को उचित स्थान देने तथा जनहित के विषयों को प्रभावी ढंग से सामने लाने पर अपने विचार व्यक्त किए। चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि तीव्र सूचना-प्रवाह के वर्तमान दौर में गति के साथ विश्वसनीयता और भाषा की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मीडिया प्रतिनिधियों ने हिंदी को व्यापक जनसंपर्क एवं जनसंवाद की प्रभावशाली भाषा बताते हुए कहा कि सरल और सहज हिंदी में प्रस्तुत तथ्य एवं सूचनाएँ समाज के अधिक बड़े वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुँचती हैं। साथ ही स्वच्छता, पर्यावरण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर जनमत तैयार करने एवं व्यवहारगत परिवर्तन को प्रोत्साहित करने में मीडिया की सकारात्मक भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।

गोष्ठी में केंद्रीय विद्यालय, शक्तिनगर की विशेष सहभागिता ने कार्यक्रम को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयाम प्रदान किया। इस अवसर पर युवा पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने, उनमें भाषायी अभिव्यक्ति एवं पठन-पाठन की रुचि विकसित करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों, जिम्मेदार संचार और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी का भविष्य नई पीढ़ी द्वारा ज्ञान, तकनीक और रचनात्मक अभिव्यक्ति की भाषा के रूप में उसे अपनाने से और सशक्त होगा। कार्यक्रम के अंत में सुश्री रमा साहा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों, मीडिया प्रतिनिधियों, केंद्रीय विद्यालय शक्तिनगर के प्रतिनिधियों, एनटीपीसी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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