राउरकेला।सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र ने आगामी वर्षा ऋतू को ध्यान में रखते हुए, संयंत्र एवं इस्पात शहर के क्षेत्र में व्यापक मानसून तैयारी अभियान शुरू किया है, ताकि वर्षा ऋतु के दौरान निर्बाध उत्पादन, परिचालन सुरक्षा तथा प्रभावी बाढ़ प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
विभिन्न संयंत्र इकाइयों में टास्क फोर्स द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण तथा पूर्व वर्षों के मानसून अनुभवों के आधार पर मानसून तैयारी हेतु व्यापक कार्य योजना-2026 तैयार की गई है। इस अभियान का नेतृत्व सिविल इंजीनियरिंग सर्विसेज (सीईएस) विभाग कर रहा है तथा अन्य विभागों के समन्वय से गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।
तैयारी उपायों के अंतर्गत, गुराडीह नाला, नॉर्थ चैनल तथा प्रमुख सड़क किनारे नालियों में बड़े पैमाने पर खरपतवार हटाने, कीचड़ निकालने तथा सफाई कार्य किए जा रहे हैं, ताकि वर्षा जल का निर्बाध बहाव सुनिश्चित हो सके। विभागीय बैटरी सीमा से बाहर स्थित सभी भूमिगत नालियों एवं जल निकासी प्रणालियों की सफाई एवं रख-रखाव का कार्य भी सीई(एस) द्वारा किया जा रहा है, जबकि संबंधित विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों के अंदरूनी नालों की सफाई एवं रख-रखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोक ओवन, सीडीसीपी, ब्लास्ट फर्नेस, एसजीपी, एसपी-1, सीपीपी-1, ओबीबीपी, प्लेट मिल, एचएसएम तथा बैटरी सेक्शनों सहित संवेदनशील क्षेत्रों में पंपों और जल निकासी (डीवाटरिंग) प्रणालियों के निवारक रख-रखाव पर विशेष जोर दिया गया है।
तैयारी को और सुदृढ़ करने के लिए बाढ़ नियंत्रण गतिविधियों हेतु अतिरिक्त मानव संसाधन की तैनाती की जा रही है तथा तैनाती से पूर्व उन्हें उन्मुखीकरण प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। विभागों को यह भी निर्देश दिया गया है कि भारी वर्षा शुरू होने से पहले छत की नालियों (रूफ गटर्स), डाउन कॉमर पाइप तथा जल निकासी से संबंधित संरचनाओं की मरम्मत एवं रख-रखाव कार्य पूरा कर लें।
विशेषतः एचएसएम-2 के पंप हाउस के पास ह्यूम पाइप कल्वर्ट सहित निर्मित नया तटबंध जल प्रवाह में बाधा के रूप में चिन्हित किया गया है और मानसून के दौरान जल निकासी को सुचारु बनाने हेतु इसे हटाया जा रहा है। इसी प्रकार, डब्ल्यूटी-1 तथा नए सीआईएसएफ गेट के पास गुराडीह नाले में उत्पन्न अवरोधों को भी वर्षा जल के निर्बाध निकास के लिए प्राथमिकता के आधार पर हटाया जा रहा है।
कार्य योजना में लैगून गेट्स की परिचालन तत्परता, आपातकालीन प्रतिक्रिया हेतु वाहनों एवं क्रेनों की तैनाती, महत्वपूर्ण जल निकासी बिंदुओं पर प्रकाश व्यवस्था तथा चौबीसों घंटे बाढ़ नियंत्रण सहायता प्रणालियों की उपलब्धता भी शामिल है।
सभी मानसून तैयारी गतिविधियों को 10 जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, 15 जून से 30 सितंबर 2026 तक सीईएस कार्यालय में 24×7 बाढ़ नियंत्रण कक्ष संचालित रहेगा। यह नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे निगरानी एवं अन्य विभागों के साथ समन्वय सुनिश्चित करेगा, ताकि मानसून से संबंधित किसी भी समस्या का त्वरित समाधान किया जा सके।
