राउरकेला। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैव विविधता के हो रहे नुकसान को रोकने तथा सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस मनाया जाता है। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) में ‘प्रकृति संरक्षण’ जिम्मेदार एवं सतत इस्पात उत्पादन की कार्यदृष्टि का अभिन्न अंग रहा है। नवीन तकनीकों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कुशल संसाधन प्रबंधन तथा निरंतर पर्यावरणीय संरक्षण के लिए किए जा रहे रणनीतिक प्रयासों के माध्यम से इस्पात संयंत्र अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है। संसाधन संरक्षण आरएसपी के प्रमुख केंद्रित क्षेत्रों में से एक रहा है। संयंत्र ने प्राकृतिक संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने, उत्सर्जन को कम करने तथा अपशिष्ट उत्पादन को न्यूनतम करने वाली तकनीकों में निरंतर निवेश किया है। लौहयुक्त अपशिष्टों के पुनर्चक्रण के लिए 0.18 MTPA माइक्रो पेलेट प्लांट की स्थापना तथा ब्लास्ट फर्नेस परिचालन में बायोचार इंजेक्शन के परीक्षण जैसी अभिनव पहलें चक्रण अर्थव्यवस्था की अवधारणाओं और स्वच्छ इस्पात उत्पादन को अपनाने के प्रति आरएसपी की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
जीवाश्म ईंधन की खपत में कमी आरएसपी के प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक रही है। एक महत्वपूर्ण पहल के तहत इस्पात उत्पादन प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली अपशिष्ट गैसों का कैप्टिव पावर प्लांट-1 के बॉयलरों में प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे बॉयलर-ग्रेड कोयले की आवश्यकता में उल्लेखनीय कमी आई है। संयंत्र ने धातुकर्मीय उप-उत्पादों के लाभकारी उपयोग में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। जहाँ ब्लास्ट फर्नेस स्लैग का लगभग पूर्ण उपयोग किया जा रहा है, वहीं बीओऍफ़ और एसएमएस स्लैग की महत्वपूर्ण मात्रा को संसाधित कर बुनियादी ढाँचा विकास तथा अन्य औद्योगिक उपयोगों के लिए उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित किया जा रहा है।
जल संरक्षण आरएसपी की सतत विकास यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है। संयंत्र ने टाउनशिप में 30 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया है, जिससे अपशिष्ट जल का उपचार एवं पुन: उपयोग संभव हो रहा है। संयंत्र के भीतर ट्रीटमेंट सिस्टम-1 (टीएस-1) भी चालू किया गया है। यह अत्याधुनिक सुविधा 13 अलग-अलग स्थानों से आने वाले अपशिष्ट जल को एकत्रित कर उसका उपचार करती है। 1,800 घन मीटर प्रति घंटे की उपचार क्षमता वाला टीएस-1 उपचारित जल को पुनर्चक्रण कर कंस्ट्रक्शन पंप हाउस और JUSCO पंप हाउस में पुन: उपयोग के लिए उपलब्ध कराता है, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। इन निरंतर प्रयासों के उत्कृष्ट परिणाम सामने आए हैं। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान आरएसपी ने क्रूड स्टील के प्रति टन 2.94 घन मीटर (m³/TCS) की अब तक की सबसे कम विशिष्ट जल खपत दर्ज की, जिससे जल दक्षता के क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित हुआ है। उल्लेखनीय है कि, टीएस-2 का परियोजना कार्य भी पूरे जोर-शोर से जारी है। अपने परिचालन क्षेत्र से आगे बढ़कर आरएसपी बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान, स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संबंधी महत्वपूर्ण दिवसों के आयोजन, विद्यालय संपर्क कार्यक्रमों तथा सीएसआर पहलों के माध्यम से कर्मचारियों, विद्यार्थियों और समुदाय के बीच पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता को सक्रिय रूप से बढ़ावा देता है। ये गतिविधियां इस संदेश को सुदृढ़ करती हैं कि प्रकृति की रक्षा करना एक साझा जिम्मेदारी है, जिसके लिए सामूहिक भागीदारी की आवश्यक है।
