राउरकेला। सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) पार्श्वांचल गांवों के निवासियों को स्वयं का छतु व्यवसाय शुरू करने हेतु आवश्यक कौशल प्रदान कर उद्यमिता के बीज बो रहा है। उल्लेखनीय है कि छतु उत्पादन आज के समय में सबसे अधिक लाभदायक, कम पूंजी निवेश वाला तथा टिकाऊ कृषि-आधारित व्यवसायों में से एक माना जाता है। वर्ष 2025-26 के दौरान आरएसपी के सीएसआर विभाग द्वारा सेक्टर-20 स्थित पार्श्वांचल विकास संस्थान (आईपीडी) में छतु उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिससे बिसरा, नुआगांव और लाठीकटा प्रखंडों के लगभग 80 ग्रामीण लाभान्वित हुए। विभिन्न बैचों में आयोजित इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ढिंगरी छतु उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागी बरकानी, बंडामुंडा आरएस कॉलोनी, डुमेरता, सिनेमा टोली, बिसपुर, कुंद्रा, चुआबाहल, घोड़ाबांधा, लिमड़ा, मधुपुर, टंगरपली, खैरटोला नुआगाँव तथा पटुआ गांवों से थे।
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया, जिनमें कच्चे माल का चयन, उत्पादन माध्यम की तैयारी, स्पॉनिंग तकनीक, तापमान एवं आर्द्रता का रखरखाव, कीट प्रबंधन, छतु निकलना तथा निकलने के उपरांत प्रबंधन शामिल थे। कक्षागत प्रशिक्षण के अलावा प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक प्रदर्शन एवं प्रत्यक्ष प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया, जिससे उनमें स्वतंत्र रूप से मशरूम उत्पादन करने का आत्मविश्वास विकसित हुआ। टी. वेंगरा और सुश्री कमला टोप्पो इस कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर थे।प्राप्त कौशल और प्रारंभिक किट की सहायता से प्रशिक्षुओं ने अपने घरों में छतु उत्पादन शुरू किया और वर्ष के दौरान सामूहिक रूप से 100 किलोग्राम से अधिक छतु उगाये । उत्पादित छतु का उपयोग परिवारों द्वारा स्वयं के खाने के लिए किया गया तथा स्थानीय समुदायों में इसकी बिक्री भी की गई, जिससे छतु के पोषण संबंधी लाभों और इसके व्यावसायिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ी। कई प्रतिभागियों के लिए यह अर्जित कौशल अब उद्यमिता की दिशा में पहला कदम बन चुका है तथा उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहा है।
