दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन का समापन
रायपुर,/ हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू), रायपुर ने 10–11 अक्टूबर 2026 को आयोजित दो दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन के समापन पर यूनिवर्सिटी परिसर में इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर स्थापित करने की योजना की घोषणा की। “Governing Disputes: International Law, Treaty Frameworks & Commercial Arbitration” (“गवर्निंग डिस्प्यूट्स: इंटरनेशनल लॉ, ट्रीटी फ्रेमवर्क्स एंड कमर्शियल आर्बिट्रेशन”) थीम पर आयोजित इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य इंटरनेशनल लॉ, ट्रीटी फ्रेमवर्क्स और कमर्शियल आर्बिट्रेशन से जुड़े समकालीन मुद्दों पर अकादमिक एवं व्यावसायिक विमर्श को आगे बढ़ाना था।
कॉन्फ्रेंस के समापन दिवस पर मीडिया से बातचीत के दौरान एचएनएलयू के वाइस-चांसलर प्रो. वी. सी. विवेकानंदन ने यह घोषणा की। प्रस्तावित एचएनएलयू इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन इंस्टीट्यूट (एचआईएएमआई) की स्थापना के लिए 30 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इसे वर्ष 2028 की शुरुआत में एचएनएलयू के सिल्वर जुबली वर्ष के दौरान लॉन्च करने की योजना है।

इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन स्कूल ऑफ लॉ एंड बिज़नेस के अंतर्गत सेंटर फॉर कमर्शियल आर्बिट्रेशन तथा स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के अंतर्गत सेंटर फॉर इंटरनेशनल लॉ एंड डिप्लोमेसी द्वारा किया गया। इसमें हैदराबाद स्थित महिंद्रा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ ने सहयोग किया, जबकि यूएनसीसी इंडिया संस्थागत एवं नॉलेज पार्टनर रहा।
उद्घाटन समारोह
10 अक्टूबर 2026 को आयोजित उद्घाटन समारोह में न्यायमूर्ति गोड़ा रघुराम, डिस्टिंग्विश्ड ज्यूरिस्ट प्रोफेसर, एचएनएलयू एवं नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी, भोपाल के पूर्व निदेशक, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ प्रो. रणबीर सिंह, डिस्टिंग्विश्ड ज्यूरिस्ट प्रोफेसर एवं प्रख्यात शिक्षाविद, तथा ए. जे. जवाद, सीईओ एवं रजिस्ट्रार, इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर (आईएएमसी), हैदराबाद, गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शामिल हुए।अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. विवेकानंदन ने कहा: “ट्रांज़ैक्शन इक्कीसवीं सदी का है, लेकिन डिस्प्यूट के प्रोसीजरल टाइम का कैदी बन जाने का खतरा बना रहता है।”
उन्होंने आगे कहा: “टेक्नोलॉजी की शेल्फ लाइफ लगातार घट रही है, जबकि लीगल डिस्प्यूट्स की शेल्फ लाइफ लंबे समय तक बनी रह सकती है।”उन्होंने यह भी रेखांकित किया: “इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन को केवल लीगल प्रैक्टिस की एक विशेष शाखा के रूप में नहीं, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी के संस्थागत इंफ्रास्ट्रक्चर के हिस्से के रूप में समझा जाना चाहिए।”
उद्घाटन समारोह का एक महत्वपूर्ण आकर्षण एचएनएलयू और इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर, हैदराबाद के बीच मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर रहा। इस एमओयू के माध्यम से आर्बिट्रेशन और मेडिएशन के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। समारोह के दौरान कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत रिसर्च योगदानों को संकलित करने वाली बुक ऑफ एब्स्ट्रैक्ट्स का डिजिटल विमोचन भी किया गया।
पैनल डिस्कशन्स: आर्बिट्रेशन से जुड़े समकालीन प्रश्न
कॉन्फ्रेंस में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीन पैनल डिस्कशन्स आयोजित किए गए। पहला पैनल “व्हेन आर्बिट्रेशन मीट्स द स्टेट: व्हेयर डज़ द प्राइवेट एडजुडिकेशन एंड ऐंड पब्लिक लॉ बिगिन?” विषय पर केंद्रित था। इसमें आर्बिट्रेशन और पब्लिक लॉ के बीच संबंध, राज्य की भूमिका, न्यायिक निगरानी तथा प्राइवेट एडजुडिकेशन की सीमाओं पर चर्चा हुई।
इस पैनल में माननीय न्यायमूर्ति जी. रघुराम; पी. वी. एस. गिरिधर, सीनियर एडवोकेट, मद्रास हाई कोर्ट एवं डिस्टिंग्विश्ड ज्यूरिस्ट प्रोफेसर, एचएनएलयू; प्रो. (डॉ.) ई. आर. जयराम, डीन, स्कूल ऑफ लॉ, महिंद्रा यूनिवर्सिटी; तथा डॉ. डैनियल मैथ्यू, एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ लॉ, एनएलयू दिल्ली, शामिल हुए। पैनल की अध्यक्षता न्यायमूर्ति जी. रघुराम ने की, जबकि डॉ. कौमुदी चल्ला, एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ लॉ, एचएनएलयू, ने पैनल की चर्चा का संचालन किया।
दूसरा पैनल “आर्बिट्रेशन फॉर यंग प्रैक्टिशनर्स: व्हाट चेंजेज़ व्हेन आर्बिट्रेशन गोज़ इंटरनेशनल?” विषय पर आयोजित किया गया। इसमें इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन के बदलते प्रोफेशनल परिदृश्य तथा युवा प्रैक्टिशनर्स के सामने मौजूद चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा हुई।
इस पैनल में प्रो. (डॉ.) ओ. वी. नंदीमठ, वाइस-चांसलर, एनयूजेएस, कोलकाता; प्रो. (डॉ.) प्रिया विनजामुरी, प्रोफेसर ऑफ लॉ, लॉ कॉलेज देहरादून, उत्तराखंड यूनिवर्सिटी;ए. जे. जवाद, सीईओ एवं रजिस्ट्रार, आईएएमसी हैदराबाद; तथा सुश्री अद्वैता शर्मा, एडवोकेट एवं सेक्रेटरी, यूएनसीआईटीआरएएल नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी, इंडिया, ने भाग लिया। पैनल का संचालन डॉ. अमितेश देशमुख, असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ लॉ, एचएनएलयू, ने किया।
तीसरा पैनल “द नेक्स्ट चैप्टर ऑफ इंडियन आर्बिट्रेशन: ऑन द मूवमेंट फ्रॉम डोमेस्टिक प्रैक्टिस टू ग्लोबल सीट” विषय पर केंद्रित था। इसमें इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन के क्षेत्र में भारत की बदलती स्थिति तथा वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान मजबूत करने के लिए आवश्यक संस्थागत और व्यावसायिक विकास पर विचार-विमर्श हुआ।
इस पैनल में ए. जे. जवाद, सीईओ एवं रजिस्ट्रार, आईएएमसी हैदराबाद; अजय थॉमस, इंडिपेंडेंट आर्बिट्रेटर एवं एडीआर कंसल्टेंट; सुश्री हमीदा सिद्दीकी, सीनियर एडवोकेट, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन; तथा लोकनाथ चटर्जी, स्टैंडिंग काउंसल, गवर्नमेंट ऑफ वेस्ट बंगाल, शामिल हुए। चर्चा का संचालन डॉ. अनिंद्य तिवारी, असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ लॉ, एचएनएलयू, ने किया।
कॉन्फ्रेंस का एक प्रमुख हिस्सा सात समानांतर टेक्निकल सेशंस की श्रृंखला रही। इन सत्रों में आर्बिट्रेशन से जुड़े समकालीन मुद्दों पर रिसर्च पेपर्स प्रस्तुत किए गए और अकादमिक चर्चाएँ हुईं। इनमें ट्रीटी इंटरप्रिटेशन, इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट, कमर्शियल डिस्प्यूट्स, आर्बिट्रल अवॉर्ड्स के प्रवर्तन, पब्लिक पॉलिसी, नेशनल सिक्योरिटी, क्लाइमेट चेंज और उभरती टेक्नोलॉजी जैसे विषय शामिल रहे।
वैलेडिक्टरी सेरेमनी और रिसर्च योगदानों का सम्मान
11 अक्टूबर 2026 को आयोजित वैलेडिक्टरी सेरेमनी के साथ दो दिवसीय अकादमिक आयोजन का समापन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अनीता सिंह, फैकल्टी कन्वीनर, आईसीआईए 2026, के वेलकम एड्रेस से हुई। इसके बाद डॉ. अमितेश देशमुख, फैकल्टी कन्वीनर, आईसीआईए 2026, ने कॉन्फ्रेंस रिपोर्ट प्रस्तुत की।
उद्घाटन संबोधन प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, वाइस-चांसलर, एचएनएलयू, रायपुर, ने दिया। समारोह में एडवोकेट अजय थॉमस, इंडिपेंडेंट आर्बिट्रेटर एवं एडीआर कंसल्टेंट, तथा प्रो. (डॉ.) ई. आर. जयराम, डीन, स्कूल ऑफ लॉ, महिंद्रा यूनिवर्सिटी, ने भी संबोधन दिया। प्रो. (डॉ.) ओ. वी. नंदीमठ, वाइस-चांसलर, एनयूजेएस, कोलकाता, ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर प्रतिभागियों को संबोधित किया।
वैलेडिक्टरी कार्यक्रम के दौरान सात टेक्निकल सेशंस में प्रस्तुत रिसर्च योगदानों को मान्यता देने के लिए बेस्ट पेपर प्रेज़ेंटर्स अवॉर्ड सेरेमनी भी आयोजित की गई। कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागियों द्वारा रिसर्च पेपर्स प्रस्तुत किए गए।
सात टेक्निकल सेशंस में बेस्ट पेपर अवॉर्ड्स निम्नलिखित प्रतिभागियों को प्रदान किए गए:
विवेक कुशवाहा एवं देवराज सिंह रावत, फैकल्टी ऑफ लॉ, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी। लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) महिपाल लाठर, नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, दिल्ली, एवं प्रत्युष पांडेय, एचएनएलयू, रायपुर। आयुष पाठक एवं अभिनव ओझा, एमएनएलयू, नागपुर। राजीब कुमार मोहंती, एचएनएलयू, रायपुर, एवं अनमोल साई, एनएलएसआईयू, बेंगलुरु। सुश्री अनुष्का शर्मा एवं सुश्री मेहक जोशी, डीएनएलयू, जबलपुर। श्रेयांश जैन एवं सुश्री कीर्ति सिन्हा, एनएलयू, ओडिशा। अनिरुद्ध गुप्ता एवं अभिषेक कुमार, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर। कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन दिवस पर प्रो. योगेंद्र श्रीवास्तव, डायरेक्टर, स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी, ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया। कॉन्फ्रेंस की रूपरेखा तैयार करने और इसके संचालन में डॉ. अनीता सिंह, हेड, सेंटर फॉर इंटरनेशनल लॉ एंड डिप्लोमेसी, तथा डॉ. अमितेश देशमुख, हेड, सेंटर फॉर कमर्शियल आर्बिट्रेशन, ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंश पराशर एवं सुयश कपासिया ने स्टूडेंट कन्वीनर्स के रूप में आयोजन में सहयोग दिया।
कार्यक्रम के दौरान ‘एचएटी’ (HAT) – एचएनएलयू आर्बिट्रेशन थॉट बुक का कर्टेन रेज़र भी प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तावित प्रकाशन की टैगलाइन “थॉटस्केपिंग द फ्यूचर ऑफ आर्बिट्रेशन” है और इसे वर्ष 2027 से प्रकाशित किए जाने की योजना है। इस कॉन्फ्रेंस ने इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन और मेडिएशन के क्षेत्र में अकादमिक विमर्श, संस्थागत सहयोग और व्यावहारिक प्रशिक्षण को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। प्रस्तावित एचएनएलयू इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन इंस्टीट्यूट की योजना इस दिशा में यूनिवर्सिटी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
