ओशो का मार्ग उत्सव एवं उल्लास का मार्ग है – राजनाथ दुबे

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रहस्यदर्शी ओशो के जन्मदिवस पर साहित्यिक, सामाजिक संस्था सोन संगम की विचार गोष्ठी 

शक्तिनगर, सोनभद्र। साहित्यिक, सामाजिक संस्था सोन संगम के तत्वावधान में, प्रख्यात रहस्यदर्शी ओशो के जन्मदिवस के अवसर पर एनटीपीसी कॉलोनी परिसर, शक्तिनगर में 11 दिसम्बर, गुरुवार की शाम एक विचारगोष्ठी का आयोजन नरेन्द्र भूषण शुक्ल, प्राचार्य, विवेकानन्द वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की अध्यक्षता एवं राजनाथ दुबे, वरिष्ठ प्रबन्धक, एनसीएल दुधीचुआ के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम का आरम्भ ओशो के प्रवचनांशों के श्रवण एवं ध्यान से हुआ। अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम का संचालन सोन संगम के सचिव डॉ0 मानिक चन्द पाण्डेय ने किया। 

विचारगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि राजनाथ दुबे ने कहा कि ओशो का मार्ग उत्सव एवं उल्लास का मार्ग है। उन्होंने विश्व की सभी आध्यात्मिक परम्पराओं की पुनर्व्याख्या करते हुए उन्हें वर्तमान के लिए प्रासंगिक बनाया। अध्यक्षता कर रहे नरेन्द्र भूषण शुक्ल ने ओशो को भारत की समृद्ध आध्यात्मिक परम्परा का उज्ज्वल नक्षत्र निरूपित किया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्राध्यापक डॉ0 छोटेलाल जायसवाल ने ओशो को नये मनुष्य का प्रस्तोता बताया। डॉ0 मानिक चन्द पाण्डेय ने कहा कि ओशो ने धार्मिक पाखण्ड का पूरे साहस से प्रतिकार किया। डॉ0 योगेन्द्र मिश्र ने कहा कि ओशो भगवान बुद्ध के बाद ध्यान के सबसे बड़े ध्यान आन्दोलन हैं। वाराणसी से ऑनलाइन जुड़े कौशलेश द्विवेदी ने ओशो को सरल, सहज अध्यात्म का पथ प्रदर्शक बताया। उक्त अवसर पर करुणा, गौतमी, समिधा सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सोन संगम के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय दुबे द्वारा आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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