अब फागुनी माहौल में घुलने लगा बसंत की मादकता का रंग

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 सरसों के पीले फुल और हरियाली से रंगी धरती मोह रही सबका मन

सोनभद्र। बसंत की मादकता का रंग अब फागुनी माहौल में घुलने लगा है। मौसम परिवर्तन के साथ ही हल्की गुलाबी जाडे़ की वजह से माहौल फागुनी माहौल में सराबोर दिख रहा है। फाल्गुन मास भी शुरू हो गया है। पतझड़ के चलते झाड़-झंखाड़ में तब्दील हो चुके पेड़-पौधों में फुटती नई-नई कपोलें प्रकृति के रूप मेेें निखार ला रही है। लालिमायुक्त यह कपोले सभी को आकर्षित कर रही है। इन दिनों धरती का रंग पूरी तरह निखरा हुआ है। खेतों में दूर-दूर तक फैले सरसों के पीले फूल तथा हरियाली सभी का मन मोह ले रही है। प्रकृति ने एक से एक सच्चे रंग भर कर अद्भुत रचनाएं बनाई है। चहुंओर उन्माद और उल्लास का रंग बिखर गया है। किसानों का दिल सरसों की पीली डालियां देख मोर के मानिंद नाच रहा है। फूलों का रस लेने के लिए तितलियां उनके इर्द-गिर्द मंडरा रही हैं। मटर-मसूर आदि फसलों के फूल भी प्रकृति को बहुरंगी बना दिया है। फूलों से उठती तरह-तरह की सुगंध से माहौल में मादकता का रंग घुलने लगा है। आम के वृक्षों पर बौर की ताजी कोपलें सुहावने मौसम का परिचय दे रही हैं। फागुनी बयार प्रारम्भ होने के साथ ही होली के गीत भी सुनाई देने लगे हैं। युवाओं की हंसी से रूमानियत भरी मस्ती का माहौल बन गया है। युवाओं का अल्हड़ मन कुछ बहका-बहका सा नजर आने लगा है। अभी तक जहां होलिका नहीं गड़ी हैं वहां के उत्साही युवा इसे गाड़ने शुरू कर दिये हैं। कुल मिलाकर इन दिनों यह मौसम सोनांचल की हसीन वादियों में चार चाँद लगा दिया है। 

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