जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक संपन्न
चन्दौली। कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि कुपोषण उन्मूलन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, अतः इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।
जिला पोषण समिति की समीक्षा बैठक में पोषण ट्रैकर ऐप पर मोबाईल वेरिफिकेशन में बाल विकास परियोजना शहाबगंज की प्रगति सबसे कम 85 प्रतिशत होने पर जिलाधिकारी द्वारा नाराजगी व्यक्त करते हुए, बाल विकास परियोजना अधिकारी शहाबगंज को निर्देशित किया कि इस माह सभी लाभार्थियों का मोबाइल वेरिफिकेशन सुनिश्चित करायें। फेश रिकॉग्निशन सिस्टम (एफ०आर०एस०) के माध्यम से लाभार्थियों को पोषाहार वितरण की फिडिंग जनपद की 60 प्रतिशत होने पर जिलाधिकारी द्वारा नाराजगी व्यक्त की गयी, जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा बताया गया कि माह जून, 2026 में ऑगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार की आपूर्ति विलम्ब से होने के कारण फिडिंग कम हुई, जिस पर जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि माह जुलाई, 2026 में शत-प्रतिशत एफ०आर०एस० की फिडिंग होनी चाहिए।
पोषण पुर्नवास केन्द्र की समीक्षा में पाया गया कि माह जून, 2026 में बेड ऑक्यूपेन्सी 67 प्रतिशत होने पर जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि परियोजनावार लक्ष्य निर्धारित करते हुए सैम बच्चों (गम्भीर अति कुपोषित) पोषण पुर्नवास केन्द्र में भर्ती करायें, जिससे बेड ऑक्यूपेन्सी 100 प्रतिशत रहे।प्रधानमंत्री मात्र वंदना योजना के अन्तर्गत बाल विकास परियोजना सकलडीहा और धानापुर में लाभार्थियों के आवेदन कम होने पर जिलाधिकारी द्वारा चेतावनी देते हुए निर्देशित किया गया कि माह जुलाई, 2026 में लक्ष्य के सापेक्ष 100 प्रतिशत लाभार्थियों का आवेदन कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देशित किया कि कागजी आंकड़ों और जमीनी हकीकत में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। आंगनबाड़ी केंद्र का नियमित निरीक्षण किया जाए यदि किसी केंद्र पर राशन वितरण या बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित मुख्य सेविका और सीडीपीओ की जवाबदेही तय करते हुए उनके खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि अति कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC) में भर्ती कराया जाए और उनके स्वास्थ्य में सुधार की साप्ताहिक मॉनिटरिंग हो।
स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं की समय पर स्वास्थ्य जांच, हीमोग्लोबिन टेस्ट और आयरन-फॉलिक एसिड की गोलियों का वितरण सुनिश्चित किया जाए। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपनी भूमि उपलब्ध है, वहां अनिवार्य रूप से ‘पोषण वाटिका’ (किचन गार्डन) विकसित की जाए ताकि बच्चों को ताजा और पौष्टिक साग-सब्जियां मिल सकें। पंचायती राज, स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल विकास विभाग आपस में बेहतर तालमेल बिठाकर ग्राम स्तर पर ‘ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस’ (VHSND) का सफल आयोजन करें। इस अवसर पर मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित सभी ब्लॉकों के खंड विकास अधिकारी और सीडीपीओ मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
