प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है- एस. राजलिंगम

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*मंडलायुक्त ने किसानों से वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्राकृतिक खेती को अपनाने का किया आह्वान*

 वाराणसी। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) के सभागार में सोमवार को प्राकृतिक खेती एवं गौ-आधारित कृषि विषय पर एक भव्य व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें देश के सुप्रसिद्ध प्राकृतिक कृषि विशेषज्ञ एवं बंसी गीर गोशाला तथा गोतीर्थ विद्यापीठ, अहमदाबाद के संस्थापक गोपालभाई सतुरिया ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में जनपद वाराणसी सहित आसपास के क्षेत्रों के लगभग 600 प्रगतिशील कृषकों ने सहभागिता कर प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीकों एवं अनुभवों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडलायुक्त एस. राजालिंगम ने की। इस अवसर पर भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार, उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह सहित कृषि, उद्यान एवं अनुसंधान संस्थानों के अनेक वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। अहमदाबाद से पधारे वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों ने भी कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए।

       मुख्य वक्ता गोपालभाई सतुरिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती केवल उत्पादन की तकनीक नहीं बल्कि प्रकृति, पशुधन, मृदा एवं मानव स्वास्थ्य के मध्य संतुलन स्थापित करने का एक समग्र जीवन दर्शन है। उन्होंने गौ-आधारित कृषि, जीवामृत, घनजीवामृत, गो-कृपा अमृतम तथा देशी गायों के संरक्षण के माध्यम से कृषि लागत में कमी लाने और भूमि की उर्वरता बढ़ाने के सफल अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए प्राकृतिक खेती एक प्रभावी एवं टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर रही है।

मंडलायुक्त एस. राजालिंगम ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण तथा किसानों की आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान किया तथा कहा कि शासन द्वारा भी इस दिशा में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

 भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती एवं वैज्ञानिक अनुसंधान का समन्वय भविष्य की कृषि को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाएगा। उन्होंने किसानों को संस्थान द्वारा विकसित उन्नत तकनीकों तथा प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पहलुओं से अवगत कराया। उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल ने उपस्थित कृषकों का स्वागत करते हुए कहा कि जनपद में प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए विभाग निरंतर प्रयासरत है तथा किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।  कार्यक्रम के दौरान कृषकों ने प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया तथा सफल किसानों एवं विशेषज्ञों के अनुभवों से प्रेरणा ली। उपस्थित किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाने एवं अपने क्षेत्रों में इसके व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ नीरज एवं धन्यवाद ज्ञापन उप कृषि निदेशक द्वारा किया गया। अंत में सभी प्रतिभागियों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने एवं स्वस्थ, समृद्ध एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।

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