कंपनी की सीएसआर पहल के अंतर्गत 160 परियोजना प्रभावित युवाओं को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण। ₹1.02 करोड़ है, कुल बजट
धनबाद।युवाओं की तकनीकी दक्षता को बेहतर कर उनके कौशल विकास के उद्देश्य से आज कोयला भवन मुख्यालय में बीसीसीएल और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीपेट), रांची के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत बीसीसीएल के परिचालन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले 160 परियोजना प्रभावित युवाओं (PAPs) को पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग से जुड़ें विभिन्न ट्रेड्स में तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य चयनित युवाओं को रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के लिए ₹1.02 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है, जिसे बीसीसीएल अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के तहत वहन करेगा।
उल्लेखनीय है कि, युवाओं के कौशल विकास के लिए बीसीसीएल और सीपेट रांची पिछले पाँच वर्षों से परस्पर सहयोग करते हुए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संचालित कर रहे हैं और अब तक पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग से जुड़ें विभिन्न ट्रेड्स में सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। प्रशिक्षित छात्रों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के साथ देश भर के प्रतिष्ठित संस्थानों में नियोजन भी प्राप्त हुए हैं।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर बीसीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक समीरन दत्ता के नेतृत्व में संपन्न हुआ। अवसर पर बीसीसीएल के निदेशक (मानव संसाधन), मुरली कृष्ण रमैया, महाप्रबंधक (सीएसआर) कुमार मनोज तथा सीएसआर टीम के अन्य सदस्य उपस्थित रहें। वहीं सीपेट रांची की ओर से निदेशक एवं प्रमुख अवनीत कुमार जोशी और प्रशिक्षण समन्वयक मासूम हैदर ने कार्यक्रम में भाग लिया।
अपने संबोधन में सीएमडी समीरन दत्ता ने कहा कि आज का यह समझौता केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारे युवाओं के कौशल विकास एवं उनके रोजगार के लिए सार्थक प्रयासों की प्रतिबद्धता है। बीसीसीएल, अपने सामाजिक दायित्वों के अंतर्गत सदैव यह प्रयास करता रहा है कि हमारे आस-पास के समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। उन्होंनें कहा कि आने वाले समय में बीसीसीएल द्वारा इस प्रकार की और गतिविधियाँ संचालित की जायेंगी जिससे अधिकाधिक युवा और जन-समुदाय लाभान्वित हो सकें।
बीसीसीएल और सीपेट रांची के इस समन्वित प्रयास से क्षेत्रीय युवाओं को जहां एक ओर आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उनके लिए उद्योग जगत में करियर निर्माण के नए द्वार भी खुलेंगे।
