पॉश अधिनियम 2013, महिला सुरक्षा और स्वच्छता पर दी गई विस्तृत जानकारी*
*’सुरक्षित और भेदभाव-मुक्त कार्यस्थल देना हर संस्था का दायित्व’*
*लखनऊ,
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार तथा जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ मलखान सिंह के मार्गदर्शन में मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, इन्दौराबाग, तहसील बख्शी का तालाब में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का निर्देशन सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कुँवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने किया।
शिविर में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 यानी पॉश अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही महिला सुरक्षा, सम्मान, स्वच्छता तथा सैनिटरी नैपकिन से संबंधित कानूनी अधिकारों पर भी प्रतिभागियों को जागरूक किया गया।
शिविर का संचालन पराविधिक स्वयं सेवक अनीता विश्वकर्मा एवं कुसुम कश्यप द्वारा किया गया। उपस्थित आशा बहुओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं और अन्य महिला प्रतिभागियों को आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की भूमिका, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा महिलाओं को प्राप्त कानूनी संरक्षण एवं अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी गई। महिला स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए मासिक धर्म स्वच्छता और सैनिटरी नैपकिन के सुरक्षित एवं नियमित उपयोग के महत्व पर भी बल दिया गया।
इस अवसर पर पराविधिक स्वयं सेवक अनीता विश्वकर्मा ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भेदभाव-मुक्त कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रत्येक संस्था का दायित्व है। उन्होंने कहा कि विधिक जागरूकता के माध्यम से महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगी और किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की स्थिति में बिना भय के कानून द्वारा प्रदत्त उपायों का उपयोग कर सकेंगी। उन्होंने सभी से महिला सम्मान एवं लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
शिविर में कविता एआरओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीकेटी, प्रतिष्ठा जनसाहस एनजीओ के प्रतिनिधि, आशा बहुएं, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिका सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
