कायस्थ महासभा ने मनायी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयन्ती 

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सोनभद्र I अखिल भारतीय कायस्थ महासभा सोनभद्र द्वारा मां भारती के दो महान सपूतों महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती महासभा के अध्यक्ष अशोक कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में मनाई गई I महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम दीप प्रज्वलित कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी वह भारत रतन लाल बहादुर शास्त्रीजी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई I महासभा के उपाध्यक्ष शिवनारायण लाल मैं कहा कि महात्मा गांधी ने सत्याग्रह के बल पर देश को आजादी दिलाई उन्हीं के लिए दो लाइन “दे दी आजादी बिना खडग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल I उन्होंने शास्त्री जी के कृतित्व  पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कि भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और प्रधानमंत्री रहते हुए भी सादगी से रहते थे, 1965 के युद्ध के दौरान जब देश में अनाज का संकट था कब उन्होंने जय जवान जय किसान का नारा दिया, शास्त्री जी ने देश को आत्मनिर्भर बनने और सैनिकों का सम्मान करने का संदेश दियाI इसी क्रम में सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्री जी की ईमानदारी आज भी दुनिया के लिए एक मिसाल है I उन्होंने बताया कि  पाकिस्तान से युद्ध के दौरान खाद्य संकट के समय उन्होंने देशवासियों से अपील करने के पहले खुद अपने परिवार के साथ एक वक्त का उपवास रखकर इसकी शुरुआत की I इसी क्रम में सुशील श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्री जी की सबसे बड़ी विशेषता और साधारण सादगी, ईमानदारी और अडिग नैतिक दृढ़ता थी I

 संतोष श्रीवास्तव ने 1965 में उन्होंने भारतीय सेवा को देश की रक्षा के लिए पूरी छूट दी और मजबूत नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया I मंत्री जितेंद्र लाल ने कहा कि शास्त्री जी को मरणोंपरांत 1966 में सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गयाI शास्त्री जी का निधन 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में हुआ I संजय श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्री जी में कुशल नेतृत्व की क्षमता  देश के प्रति निष्ठा तो थी ही साथ ही वे ईमानदारी और सादगी की पराकाष्ठा के प्रतिमूर्त थे I एडवोकेट आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि प्रधानमंत्री रहते हुए शास्त्री जी को कर लेने हेतु पंजाब नेशनल बैंक से ₹5000 का कर्ज लेना पड़ा और शास्त्री जी के निधन के बाद उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने पेंशन के पैसे से कर्ज चुकाया यह उनकी ईमानदारी का परिचायक है I महासभा के महासचिव अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्री जी की सादगी इसी बात से पता चलता है कि पद संभालने के बाद उन्होंने अपने घर से आवश्यक सरकारी सुविधाएं और कुलर तक हटवा दिए ताकि आम जनता की तरह साधारण जीवन जी सकें I एक प्रेरक प्रसंग बताते हुए कहा कि शास्त्री जब रेल मंत्री थे तो उनका परिवार दिल्ली में रहता था शास्त्री जी के पुत्र सुनील किसी निजी काम से सरकारी कार लेकर चले गए थे जब शास्त्री जी को पता चला  उन्होंने उन्होंने ड्राइवर से पूछा कितने किलोमीटर गाड़ी चली है ड्राइवर ने बताया 14 किलोमीटर उसी हिसाब से शास्त्री जी ने जो किराया हुआ उसे सरकारी खजाने में जमा कराया I

 अंत में अध्यक्षता करते हुए एडवोकेट अशोक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्री जी में गजब की नेतृत्व क्षमता थी 1965 के युद्ध में उन्होंने भारतीय सेवा को देश की रक्षा के लिए पूरी छूट दी और मजबूत नेतृत्व का परिचय दिया और वह सदैव  असाधारण सादगी में रहे I प्रधानमंत्री रहते हुए भीआम जनता की तरह साधारण जिंदगी बिना सरकारी सुविधाके जिए I शास्त्री जी ने आजादी में अपने अहम भूमिका निभाई शास्त्री जी के कार्यकाल में ही दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए श्वेत क्रांति को बढ़ावा मिला I रेल मंत्री रहते हुए एक बार एक रेल दुर्घटना हो गई शास्त्री जी ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत पद से इस्तीफा दे दिया ऐसे थे हमारे दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी I

 कार्यक्रम में रोशन लाल, एडवोकेट आनंद श्रीवास्तव, एडवोकेट संजय श्रीवास्तव, सुनील श्रीवास्तव, सर्वेश कुमार श्रीवास्तव, एडवोकेट  ऋषभ श्रीवास्तव सुनील कुमार श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष संतोष कुमार श्रीवास्तव, सुशील श्रीवास्तव, बिंदेश्वरी लाल श्रीवास्तव सहित अन्य कई बंधु उपस्थित थे I  अंत में महामंत्री अजय कुमार श्रीवास्तव ने उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त कियाI

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