एनसीएल में ‘विशेष अभियान 6.0’ का प्रारंभिक चरण आज से शुरू

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ई-वेस्ट प्रबंधन के साथ अनुपयोगी स्थानों के सदुपयोग, फाइलों के निस्तारण और कार्यालय परिसरों के उन्नयन पर रहेगा विशेष जोर

सोनभद्र, सिंगरौली। भारत सरकार की मिनीरत्न कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) में कोयला मंत्रालय के निर्देशानुसार ‘विशेष अभियान 6.0’ का प्रारंभिक चरण (प्रिपरेटरी फेज) 15 सितंबर से 30 सितंबर, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष उक्त अभियान के तहत ई-वेस्ट के प्रभावी प्रबंधन एवं निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

ई-वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण की पहल

इस अभियान के दौरान एनसीएल की डिजिटलीकरण एवं अंतर-मंत्रालयी पोर्टल से संबंधित गतिविधियों, स्पेस का कुशल प्रबंधन, कार्यालय परिसरों का उन्नयन, पर्यावरण-अनुकूल कार्यप्रणालियां, ‘वेस्ट टू वेल्थ’  नवाचारी गतिविधियों तथा अन्य से संबंधित सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (बेस्ट प्रैक्टिसीज़) की पहचान एवं उनके प्रभावी उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

चिन्हित स्थलों पर होगी साफ-सफाई

विशेष अभियान 6.0 के प्रारंभिक चरण (प्रिपरेटरी फेज) के दौरान एनसीएल की सभी परियोजनाओं एवं इकाइयों में ऐसे स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां विशेष रूप से साफ-सफाई की आवश्यकता है। इस अवसर पर कार्यस्थलों, खदानों  एवं अन्य स्थानों में स्वच्छता एवं सैनिटेशन सुनिश्चित करने के साथ-साथ अनावश्यक सामग्री को हटाने, आसपास के क्षेत्रों के बेहतर रखरखाव तथा परिसरों के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जाएगा।

अनुपयोगी स्थानों का होगा बेहतर उपयोग

इस अभियान के तहत कार्यस्थल एवं अन्य परिसरों में ऐसे अनुपयोगी या कम उपयोग में आ रहे स्थानों की पहचान की कर सफाई एवं पुनर्व्यवस्था कर उन्हें अधिकतम या वैकल्पिक उपयोग में लाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा कार्यस्थल पर उपलब्ध पुरानी भौतिक फाइलों की पहचान और कार्यान्वयन चरण के दौरान उनका निस्तारण किया जाएगा। इससे कार्यालयों में उपलब्ध स्थान के बेहतर उपयोग के साथ रिकॉर्ड प्रबंधन को भी अधिक सुव्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

2 अक्टूबर से शुरू होगा कार्यान्वयन चरण

प्रारंभिक चरण के बाद ‘विशेष अभियान 6.0’ का कार्यान्वयन चरण (इम्प्लीमेंटेशन फेज) 2  अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस चरण में प्रारंभिक चरण के दौरान चिन्हित स्थलों एवं गतिविधियों पर व्यापक स्तर पर कार्रवाई करते हुए ई-वेस्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, कार्यस्थल प्रबंधन, कार्यालय परिसरों के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता श्रमदान एवं स्थानीय समुदायों के बीच जागरूकता जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।

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