सोनभद्र। एनसीएल के नेहरू शताब्दी चिकित्सालय (एनएससी) में सीएसआर पहल ‘नन्हा-सा-दिल-एनसीएल’ के अंतर्गत नर्सिंग क्रिटिकल केयर एवं इकोकार्डियोग्राफी प्रशिक्षण का सोमवार को शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 13 से 18 जुलाई,2026 तक नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों द्वारा एनसीएल में कार्यरत चिकित्सकों को 2-डी इको कार्डियोग्राफ़ी और मेट्रोन, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ को रोगी की मूलभूत देखभाल, आराम एवं पोषण, हृदय मॉनिटरिंग एवं उपकरण संचालन, वेंटीलेशन केयर, ऑक्सीजन फ्लो मीटर का संचालन एवं देखभाल, इन्फ्यूजन पंप का संचालन एवं देखभाल, सीपीआर व बेसिक लाइफ सपोर्ट की बारीकियों से संबन्धित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान निदेशक (मानव संसाधन), मनीष कुमार बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे एवं अपने उद्बोधन में उन्होने सिंगरौली परिक्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नेहरू शताब्दी चिकित्सालय की क्रिटिकल केयर (आपातकालीन देखभाल) क्षमताओं को और अधिक सुदृढ़ करेगा, जिससे एनसीएल कर्मियों सहित सिंगरौली परिक्षेत्र में परिधीय समुदाय को उत्कृष्ट व उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही उन्होंने टीम एनएससी के समर्पण और सेवा-भाव की भी सराहना की। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा सेवाएं (एनएससी), डॉ. विवेक खरे, सीएमएस (प्रभारी), डॉ.मंजरी मेहता, महाप्रबन्धक (सीएसआर), राजीव रंजन, विभागाध्यक्ष (नेत्र विभाग), डॉ.देवी दास तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी, सत्य साईं संजीवनी अस्पताल से सौम्या जंध्याला, डॉक्टर यामिनी बाथम, गिरिजा शंकर सातम, सरोजिनी मंजूनाथ, नंद उदय कुलकर्णी एवं गौरव दत्त उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि अभी तक “नन्हा-सा-दिल-एनसीएल” सीएसआर पहल के तहत सिंगरौली एवं सोनभद्र क्षेत्र के जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित 38 हजार बच्चों की हृदय जांच तथा 251 बच्चों की निरू शुल्क जीवन रक्षक सर्जरी की जा चुकी है। नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में अत्याधुनिक नेत्र जांच मशीनों का हुआ लोकार्पण इस अवसर पर एनसीएल के निदेशक (मानव संसाधन), मनीष कुमार ने नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में एबी-स्कैन मशीन एवं यूवएम मशीन का भी उद्घाटन किया। यूबीएम स्कैन मशीन के माध्यम से आंख में प्रत्यारोपित किए जाने वाले कृत्रिम लेंस (प्व्स्) की पावर का बिल्कुल सटीक कैलकुलेशन किया जा सकेगा, जिस से मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद मरीजों की चश्मे पर निर्भरता कम हो जाएगी और वे ‘स्पेक्टेकल-फ्री विज़न’ यानी बिना चश्मे के साफ और बेहतर दृष्टि का लाभ उठा सकेंगे। इसके साथ ही, नई एबी-स्कैन मशीन के माध्यम से आंख के पिछले हिस्से, विशेषकर रेटिना और ऑप्टिक नर्व से जुड़ी गंभीर व जटिल बीमारियों की शुरुआती दौर में ही पहचान संभव हो पाएगी एवं आंखों की गंभीर बीमारियों के मामले में समय पर सटीक डायग्नोसिस होने से मरीजों को सही वक्त पर सही इलाज मिलेगा।
”नन्हा-सा-दिल-एनसीएल’’ के तहत छः दिवसीय नर्सिंग क्रिटिकल केयर एवं इकोकार्डियोग्राफी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
