*मानव संसाधन प्रमुख डॉ. विवेकानन्द मिश्रा बने भगवान शिव, पत्नी श्रद्धा मिश्रा ने निभाई माता पार्वती की भूमिका; श्रवण कुमार प्रसंग ने किया भावुक, राम-सीता जन्मोत्सव ने जगाई भक्ति, विधायक राजेंद्र मेश्राम भी पार्टी कार्यकर्ताओं संग पहुंचे रामलीला देखने
महान, सिंगरौली। हिंडालको महान में कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत रामलीला के अगले चरण में भक्ति, करुणा और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। राजा दशरथ द्वारा श्रवण कुमार पर शब्दभेदी बाण चलाने और उनके माता-पिता द्वारा राजा दशरथ को श्राप देने के मार्मिक प्रसंग से लेकर भगवान शिव-पार्वती विवाह तथा भगवान राम और माता सीता के जन्म तक की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय और जीवंत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को कभी भावुक किया, तो कभी भक्तिरस से सराबोर कर दिया।

रामलीला के मंच पर हिंडालको महान के अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवारजन विभिन्न पौराणिक पात्रों की भूमिकाओं में नजर आए। अपने संवादों, भाव-भंगिमाओं और पात्रों के अनुरूप अभिनय से उन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया। कर्मचारियों की इस प्रतिभा और समर्पण ने यह दिखाया कि कार्यस्थल की व्यस्तताओं के बीच भी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने के लिए किस तरह सामूहिक सहभागिता और उत्साह के साथ प्रयास किए जा सकते हैं।
*शिव-पार्वती विवाह बना विशेष आकर्षण*
रामलीला के प्रमुख आकर्षणों में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग रहा। भगवान शिव की भूमिका मानव संसाधन प्रमुख डॉ. विवेकानन्द मिश्रा ने निभाई, जबकि माता पार्वती के रूप में उनकी धर्मपत्नी श्रद्धा मिश्रा ने अभिनय किया। दोनों की सहभागिता ने इस प्रसंग को विशेष बना दिया। मंच पर शिव-पार्वती विवाह की प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय कर दिया और दर्शकों ने इस दृश्य का आनंद लिया।
राजा दशरथ द्वारा शब्दभेदी बाण चलाए जाने और उसके परिणामस्वरूप श्रवण कुमार के घायल होने का दृश्य रामलीला के भावुक क्षणों में शामिल रहा। श्रवण कुमार के माता-पिता का विलाप और उनके द्वारा राजा दशरथ को श्राप दिए जाने के प्रसंग ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। इस प्रसंग ने माता-पिता की सेवा, कर्तव्य और अनजाने में हुई भूल के गंभीर परिणामों का संदेश दिया।
इसके बाद भगवान राम और माता सीता के जन्म से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया गया। इन दृश्यों ने रामायण की कथा को आगे बढ़ाते हुए दर्शकों में भक्ति और उत्सुकता का संचार किया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत बनाने का प्रयास किया।हिंडालको महान की रामलीला के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि के बीच क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र मेश्राम भी अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने रामलीला का आनंद लिया। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने आयोजन में सामुदायिक सहभागिता को और व्यापक बनाया।
हिंडालको महान की यह रामलीला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों और उनके परिवारों को भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। अधिकारी और कर्मचारी विभिन्न पात्रों का अभिनय कर अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, परिवारों और क्षेत्रीय लोगों की सहभागिता इस आयोजन को सामाजिक जुड़ाव का माध्यम बना रही है। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से सत्य, त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों की सीख देने वाली यह रामलीला नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रभावशाली मंचन और दर्शकों के उत्साह ने आगामी प्रस्तुतियों के प्रति भी उत्सुकता बढ़ा दी है।
