भारतीय रेलवे में पहली बार: कानपुर लोको शेड ने ट्रेन के इंजन को नमी और बारिश से बचाने के लिए लगाया खास ‘डीह्यूमिडिफायर’

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 प्रयागराज। भारतीय रेलवे के उत्तर मध्य रेलवे अंतर्गत आने वाले इलेक्ट्रिक लोको शेड (ELS), कानपुर ने रेलवे तकनीक के क्षेत्र में एक नया और अनूठा प्रयोग किया है। कानपुर शेड ने लोकोमोटिव नंबर 44061 में औद्योगिक ‘रोटरी डेसिकेंट डीह्यूमिडिफायर” (Rotary Desiccant Dehumidifier) लगाया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ट्रेन के मुख्य इंजन में लगे ‘ट्रैक्शन कन्वर्टर’ (इंजन का मुख्य इलेक्ट्रॉनिक हिस्सा) को नमी से बचाना और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कार्यक्षमता में सुधार करना है।

यह पूरी पहल महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जो खुद इस प्रोजेक्ट और इसके प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए हैं। वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल होने वाली इस तकनीक को भारतीय रेलवे की परिस्थितियों और मौसम के हिसाब से ढालकर पहली बार आजमाया जा रहा है।

ज्ञात हो कि, ट्रैक्शन कन्वर्टर को किसी भी आधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन का ‘दिल’ माना जाता है। मानसून या अत्यधिक नमी वाले मौसम में हवा में मौजूद नमी के कारण इलेक्ट्रॉनिक कार्ड्स, कनेक्टर्स और धातु के संपर्कों में जंगऔर ऑक्सिडेशन लगने का खतरा रहता है। नमी की वजह से धूल-मिट्टी भी आसानी से चिपक जाती है, जिससे इलेक्ट्रिकल लीकेज और शार्ट सर्किट (फ्लैशओवर) की समस्याएं पैदा होती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए लगाया गया यह ‘रोटरी डीह्यूमिडिफायर’ हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी को सोख लेता है। अंदर का वातावरण सूखा रहने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित रहेंगे और अचानक खराबी आने की संभावना बहुत कम हो जाएगी। यह प्रयोग भारतीय रेलवे को यूरोपीय लोकोमोटिव प्लेटफॉर्म (जैसे एल्सटॉम प्राइमा और सीमेंस वेक्ट्रॉन) के तकनीकी मानकों के करीब पहुंचा देगा। यूरोप में इस तरह के ‘डीह्यूमिडिफिकेशन सिस्टम’ का उपयोग संवेदनशील पावर-इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित रखने के लिए सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

इस नई तकनीक के मुख्य फायदे

जंग से बचाव: इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स में जंग लगने की समस्या खत्म होगी। धूल से सुरक्षा: कंपोनेंट्स पर नमी के कारण जमा होने वाली धूल में कमी आएगी। बेहतर इंसुलेशन: उपकरणों का इंसुलेशन लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा। कम होगी खराबी: नमी के कारण होने वाले शॉर्ट सर्किट और ट्रैक्शन कन्वर्टर के फेल होने का खतरा बेहद कम हो जाएगा। समय की बचत: इंजनों की बार-बार होने वाली मरम्मत की जरूरत घटेगी और वे पटरियों पर अधिक समय तक सेवा दे सकेंगे।

फिलहाल इस सिस्टम से लैस लोकोमोटिव (No. 44061) पूरी तरह प्रयोग में है और रूट पर चल रहा है। 3 महीने के ट्रायल रन के बाद जब यह इंजन वापस कानपुर शेड आएगा, तब इसके आंकड़ों और प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो मानसून और अत्यधिक नमी वाले क्षेत्रों में चलने वाली अन्य ट्रेनों के इंजनों में भी इस किफायती तकनीक को लागू किया जाएगा।

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