दुद्धी (सोनभद्र)। कस्बे का सबसे अति-विशिष्ट और वीआईपी माना जाने वाला कचहरी मार्ग इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और घोर अव्यवस्था का सजीव जीवंत उदाहरण बन चुका है। जिस मार्ग से प्रतिदिन क्षेत्र की न्याय व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को संचालित करने वाले आला अधिकारी गुजरते हैं, वही सड़क खुद अतिक्रमण और बेतरतीब ट्रैफिक के चंगुल में कराह रही है। स्थानीय नागरिकों और अधिवक्ताओं के बीच प्रशासन की यह अनदेखी अब तीखी चर्चा और भारी आक्रोश का विषय बन चुकी है।
हैरानी की बात यह है कि इसी कचहरी मार्ग से हर रोज न्यायिक मजिस्ट्रेट सहित उपजिलाधिकारी पुलिस क्षेत्राधिकारी और तहसीलदार जैसे शीर्ष अधिकारियों की गाड़ियाँ और काफिले रेंगते हुए निकलते हैं। अधिकारियों के आवासीय क्षेत्र और महत्वपूर्ण कार्यालयों से जुड़े होने के बावजूद इस मार्ग को जाम से मुक्त कराने के लिए आज तक कोई ठोस या दूरगामी कदम नहीं उठाए गए। वीआईपी मूवमेंट के दौरान कुछ पलों के लिए होमगार्ड या सिपाही हरकत में आते हैं, लेकिन उनके जाते ही स्थिति जस की तस हो जाती है।
तस्वीरें गवाही देती हैं कि सड़क के दोनों किनारों पर दुकानदारों का अवैध कब्जा, फुटपाथ पर सजे ठेले और बेतरतीब ढंग से खड़े दोपहिया व चारपहिया वाहन इस भीषण जाम की मुख्य वजह हैं। कचहरी आने वाले दूर-दराज के फरियादियों, महिला वादकारियों और गंभीर मरीजों को इस तपती धूप और संकरी हो चुकी सड़क पर घंटों फंसे रहना पड़ता है। स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि जब खुद जिम्मेदार अफसर इस समस्या को रोज अपनी आंखों से देखते हैं, तो आखिर इसे दूर करने के लिए कोई बड़ा और कड़ा ‘अतिक्रमण हटाओ अभियान’ क्यों नहीं चलाया जा रहा?
दुद्धी बार एसोसिएशन अध्यक्ष कुलभूषण पाण्डेय का कहना है कि यदि समय रहते यहाँ एक स्थाई पार्किंग जोन विकसित नहीं किया गया और सड़कों को अतिक्रमणकारियों से मुक्त नहीं कराया गया, तो यह जाम आने वाले दिनों में किसी बड़े हादसे या गंभीर आपातकालीन संकट (जैसे एम्बुलेंस का फंसना) का सबब बन सकता है। अब देखना यह है कि इस गंभीर जनसमस्या पर जिले के उच्चाधिकारी कब संज्ञान लेते हैं या फिर जनता यूं ही इस वीआईपी अव्यवस्था का दंश झेलने को मजबूर रहेगी।
वीआईपी रूट पर ‘महाजाम’ का ग्रहण, क्या दुद्धी कचहरी रोड को कभी मिलेगी अव्यवस्था से मुक्ति
