चन्दौली। डीपीओ दर्शन निषाद द्वारा जिले में युद्ध स्तर पर डाल्फिन संरक्षण हेतू अभियान चलाया जा रहा है। विश्व डाल्फिन संरक्षण दिवस कंपोजिट स्कूल नाथूपुर एवं कंपोजिट स्कूल चांदीतारा, कंपोजिट स्कूल बखरा में जिला गंगा समिति चंदौली काशी वन्यजीव प्रभाग रामनगर, वाराणसी, जिला परियोजना अधिकारी दर्शन निषाद द्वारा डाल्फिन संरक्षण दिवस मनाया गया। विशेष रूप से सरकारी स्कूलों में डाल्फिन के आवास, भोजन, पानी तथा इनकी संख्या में आए दिन हो रहे सुधार और जानकारी के अभाव में कुछ मछुआरो द्वारा अवैध शिकार के बारे में जानकारी दिया गया कि इसका संरक्षण क्यों ज़रूरी है, जिला परियोजना अधिकारी ने बताया कि डाल्फिन जल में पाए जाने वाले दुनिया का सबसे प्राचीन जलीय जीव एवं बुद्धिमान जीव है। यह हमारे देश का राष्ट्रीय जलीय जीव हैं। यह जंहा मिलती हैं वंहा का पानी बिल्कुल ताजा साफ, पीने योग्य होता है। यह मछली नहीं बल्कि स्तनपायी जीव है।
यह बच्चे पैदा करती हैं और माँ अपने बच्चे को दूध पिलाती है। और तो और यह जल के परिस्थितिकी तंत्र को मजबूत और बैलेंस बनाए रखने में सहायक है। इसे वॉटर टाइगर भी कहा जाता है। डाल्फिन सुद्ध जल का सूचक हैं। इसको किसी भी तरह का चोट या हानि पहुंचाना पकड़े जाने परभारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 परिशिष्ट 1st के तहत 5 हजार रुपये जुर्माना और 3 साल का समान्य जेल भी हो सकता है। हमलोग इसको प्रत्येक वर्ष अक्टूबर के 5 तारिक को डाल्फिन दिवस मनाते हैं। बनारस में गौरी शंकर महादेव मंदिर के पास ढाका गाँव गंगा किनारे डाल्फिन पॉइन्ट बनाया गया है। जहा से आप गंगा में डाल्फिन सफारी यानी नाव से डाल्फिन देख सकते हैं। दूसरा मार्कण्डेय महादेव घाट, तीसरा गंगा और गोमती के संगम तट पर भी डाल्फिन देखा जा सकता है। यहां पर्यटक भी खूब आते है। अब नमामि गंगे परियोजना आ जाने से डाल्फिन का संरक्षण युद्ध स्तर से किया जा रहा है।
