कांग्रेस के हाथ लोकतंत्र और संविधान की हत्या के इतिहास से रंगे हैं, आज वही लोग लोकतंत्र बचाने का ढोंग कर रहे हैं:मंत्री ए.के.शर्मा

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विदेशी इशारे, विदेशी सहारे और विदेशी फंडिंग से देश में अराजकता फैलाने की विपक्ष की कोशिश सफल नहीं होगी

आपातकाल से लेकर 1984 के सिख नरसंहार तक कांग्रेस का इतिहास लोकतंत्र के दमन और संवैधानिक मूल्यों के अपमान का गवाह है

*देश की जागरूक जनता और भाजपा कार्यकर्ता विपक्ष की देशविरोधी राजनीति को कभी सफल नहीं होने देंगे :मंत्री ए के शर्मा*

गोरखपुर/लखनऊ। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने आज गोरखपुर में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के अवसर पर आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के हाथ भारतीय लोकतंत्र और संविधान की हत्या के खून से रंगे हैं। आज जो कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा की बातें कर रहे हैं, उन्हें अपने अतीत में झांकना चाहिए। देश का लोकतंत्र सबसे अधिक कांग्रेस के शासनकाल में कुचला गया है।

मंत्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दल एक बार फिर विदेशी इशारों, विदेशी सहारे और विदेशी फंडिंग के माध्यम से देश में अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन देश और प्रदेश की जागरूक जनता तथा भाजपा के कार्यकर्ता उनकी इन कोशिशों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे। जनसभा में हजारों की संख्या में उपस्थित क्षेत्रवासियों का उत्साह और समर्थन इस बात का प्रमाण है कि जनता देशविरोधी ताकतों और अराजकता फैलाने वाली राजनीति को पूरी ताकत से पराजित करेगी।

उन्होंने कांग्रेस के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री के चुनाव को निरस्त किया था, तब लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करते हुए पद छोड़ने के बजाय 1975 में आधी रात को देश पर आपातकाल थोप दिया गया। रातोंरात हजारों-लाखों निर्दोष नागरिकों को जेलों में बंद कर दिया गया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीन ली गई और लोकतंत्र की आवाज को दबाने के लिए दमन का लंबा दौर चलाया गया। उस समय कांग्रेस को न तो संविधान की चिंता थी और न ही लोकतंत्र की रक्षा की याद आई।

श्री शर्मा ने कहा कि जब कांग्रेस द्वारा संविधान में किए जा रहे मनमाने संशोधनों पर न्यायपालिका ने संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप हस्तक्षेप किया, तब भी कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और स्थापित प्रक्रियाओं की अनदेखी करते हुए उच्च न्यायालयों के अनेक न्यायाधीशों का स्थानांतरण किया। वर्ष 1984 में हजारों निर्दोष सिखों का कत्लेआम हुआ, तब भी कांग्रेस को लोकतंत्र और संविधान पर कोई खतरा नजर नहीं आया। कश्मीरी पंडितों को अपने ही घरों और मातृभूमि से विस्थापित होना पड़ा, तब भी इनकी संवैधानिक प्रतिबद्धता कहीं दिखाई नहीं दी।

उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस और विपक्ष को लोकतंत्र तथा संविधान पर खतरा तब दिखाई देता है, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई करता है और देश की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाता है। जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी अभियान चलाकर देश को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में निर्णायक सफलता हासिल की जाती है, तब भी विपक्ष को लोकतंत्र खतरे में दिखाई देने लगता है। यह विपक्ष की दोहरी मानसिकता और राजनीतिक अवसरवाद का प्रमाण है।

मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि देश की जनता अब सब समझ चुकी है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की दूषित राजनीति, दोहरे चरित्र और अराजकता फैलाने की रणनीति को देश के जागरूक नागरिक कभी सफल नहीं होने देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास, सुशासन, राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। जनता का विश्वास और कार्यकर्ताओं का संकल्प ही ऐसी नकारात्मक ताकतों का सबसे बड़ा जवाब है।

उन्होंने पदयात्रा और जनसभा में उमड़े जनसमर्थन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा, राष्ट्र की एकता और अखंडता तथा संवैधानिक मूल्यों के सम्मान के लिए भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता पूरी प्रतिबद्धता के साथ जनता के बीच खड़ा है।संपादकीय सुझाव: प्रेस नोट में मंत्री ए.के. शर्मा के संबोधन को केंद्र में रखते हुए आपातकाल, 1984 और कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के संदर्भों को विपक्ष के दोहरे राजनीतिक चरित्र के साथ जोड़ा गया है। प्रकाशन से पहले ऐतिहासिक और राजनीतिक आरोपों से जुड़े तथ्यों एवं शब्दावली का सत्यापन कर लेना उचित होगा।

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