*मुख्यमंत्री की बड़ी घोषणा : शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, डिगमा का नाम अब ‘अभियंता बाबा कार्तिक उरांव छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अंबिकापुर’ होगा*
*सीतापुर को मिली 28 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनने वाली 3.82 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क की सौगात, मुख्यमंत्री ने किया भूमिपूजन*
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल माध्यम से सरगुजा अंचल में आयोजित जनजातीय समाज के महान जननायक, प्रख्यात अभियंता एवं पूर्व सांसद बाबा कार्तिक उरांव के जन्मशताब्दी समारोह में शामिल होकर उनकी भव्य आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने जनजातीय समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, डिगमा, अंबिकापुर का नामकरण ‘अभियंता बाबा कार्तिक उरांव छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अंबिकापुर’ करने की महत्वपूर्ण घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का जीवन शिक्षा, संघर्ष, सामाजिक चेतना और जनजातीय समाज के स्वाभिमान की प्रेरक गाथा है। उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने और समाज तथा राष्ट्र की सेवा करने की प्रेरणा देते रहेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सीतापुर क्षेत्र को अधोसंरचना विकास की महत्वपूर्ण सौगात देते हुए सोनतराई से सूर तक लगभग 3.82 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इस सड़क के निर्माण पर 28 करोड़ रुपए से अधिक की राशि व्यय की जाएगी। इसके निर्माण से सीतापुर नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित होगा तथा व्यापारिक एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
*बाबा कार्तिक उरांव का जीवन जनजातीय समाज के स्वाभिमान और उत्थान के लिए रहा समर्पित*
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाबा कार्तिक उरांव की जन्मशताब्दी पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि बाबा कार्तिक उरांव केवल जनजातीय समाज के महान नेता ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी विचारक, उच्च शिक्षित अभियंता और समाज के अधिकारों के सजग प्रहरी थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज में शिक्षा के प्रसार, सामाजिक जागरूकता, संगठन और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने उस समय उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, जब जनजातीय समाज के लिए शिक्षा के अवसर अत्यंत सीमित थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की और विदेश में भी उच्च अध्ययन कर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की। उनकी यह उपलब्धि पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव की जन्मशताब्दी के अवसर पर जनजातीय समाज और क्षेत्रीय सांसद द्वारा शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, डिगमा, अंबिकापुर का नाम उनके नाम पर रखने का आग्रह किया गया है। जनजातीय समाज की भावनाओं और बाबा कार्तिक उरांव के ऐतिहासिक योगदान का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इस आग्रह को स्वीकार किया है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, डिगमा, अंबिकापुर ‘अभियंता बाबा कार्तिक उरांव छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अंबिकापुर’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव स्वयं एक प्रतिभाशाली अभियंता थे। इसलिए उनके नाम पर इंजीनियरिंग संस्थान का नामकरण विशेष महत्व रखता है। यह संस्थान न केवल तकनीकी शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि यहाँ अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को बाबा कार्तिक उरांव के संघर्ष, उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और समाज के प्रति समर्पण से प्रेरणा भी मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीतापुर में फोरलेन सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधुनिक, सुरक्षित और सुदृढ़ अधोसंरचना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बेहतर सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार होता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सीतापुर में सोनतराई से सूर तक राष्ट्रीय राजमार्ग के लगभग 3.82 किलोमीटर लंबे हिस्से को फोरलेन बनाया जाएगा। इस महत्वपूर्ण निर्माण कार्य पर 28 करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की जाएगी। सड़क के चौड़ीकरण से सीतापुर के लगभग पूरे शहरी क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और नागरिकों को सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज के उत्थान और अधिकारों के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और जनजातीय समुदाय की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने संसद में जनजातीय समाज की आवाज को प्रभावशाली ढंग से उठाया और समाज के हितों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनका जीवन नई पीढ़ी को शिक्षा प्राप्त करने, अपनी संस्कृति पर गर्व करने और समाज के विकास में योगदान देने की प्रेरणा देता है।
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने शिक्षा की शक्ति से जनजातीय समाज में नई चेतना का संचार किया। उन्होंने सरगुजा अंचल सहित पूरे जनजातीय समाज को शिक्षा, संगठन, सामाजिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर विधायक श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा, विधायक रामकुमार टोप्पो, अंबिकापुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, संरक्षक गणेश राम भगत, समिति के अध्यक्ष डॉ. आजाद भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
