राजभाषा पखवाड़ा के अंतर्गत एसईसीएल मुख्यालय में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन

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हास्य, व्यंग्य, गीत एवं ओजपूर्ण प्रस्तुतियों से सजी साहित्यिक संध्या, कवियों ने बांधा समां

 विलासपुर। एसईसीएल में राजभाषा पखवाड़ा 2026 के अंतर्गत 25 सितंबर को एसईसीएल मुख्यालय स्थित ऑडिटोरियम में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन के मार्गदर्शन में आयोजित इस साहित्यिक संध्या में देश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं से हास्य, व्यंग्य, गीत एवं ओज की अनूठी छटा बिखेरी।

कार्यक्रम में निदेशक (मानव संसाधन)  बिरंची दास, निदेशक (वित्त) डी सुनील कुमार,  मुख्य सतर्कता अधिकारी  हिमांशु जैन, निदेशक (तकनीकी) – संचालन  रमेश चंद्र महापात्र, निदेशक (तकनीकी) – योजना एवं परियोजना (अतिरिक्त प्रभार)   नृपेन्द्र नाथ  श्रद्धा महिला मंडल की उपाध्यक्षा श्रीमती इप्सिता दास एवं श्रीमती विनिता जैन सहित एसईसीएल संचालन समिति, एसईसीएल कल्याण मंडल, एसईसीएल सुरक्षा समिति, सीएमओएआई, सिस्टा, ओबीसी प्रतिनिधियों, विभिन्न श्रम संघों के प्रतिनिधियों, विभागाध्यक्षों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने कवियों का स्वागत करते हुए कहा कि राजभाषा पखवाड़ा के अंतर्गत आयोजित यह कवि सम्मेलन हिंदी भाषा एवं साहित्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को दिशा देने और सकारात्मक संदेश पहुंचाने का कार्य करते हैं। कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से उपस्थित श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। प्रसिद्ध कवयित्री एवं गीतकार डॉ. सरिता शर्मा ने अपनी भावपूर्ण गीत प्रस्तुतियों से जीवन, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया। हास्य कवि एवं लोक गायक  जगवीर राठी ने अपनी लोक शैली और हास्यपूर्ण अंदाज से सभागार में हंसी की फुहार बिखेरी। वरिष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि  सुदीप भोला ने अपनी चुटीली व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से सामाजिक परिस्थितियों पर सहज कटाक्ष किए।

ओज एवं वीर रस के प्रसिद्ध कवि  अशोक चारण ने अपनी जोशीली कविताओं से वातावरण में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। युवा कवि एवं गीतकार  स्वयं श्रीवास्तव ने अपनी संवेदनशील गीतात्मक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। हास्य-व्यंग्य के लोकप्रिय कवि शंभू शिखर ने अपनी मंचीय शैली और हास्यपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को खूब गुदगुदाया। शृंगार एवं प्रेम रस की कवयित्री डॉ. तिष्या श्री ने अपनी मधुर कविताओं से साहित्यिक माधुर्य घोला, वहीं युवा हास्य कवि एवं व्यंग्यकार हीरामणि वैष्णव ने अपनी विशिष्ट हास्य शैली से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। कवियों की विविध प्रस्तुतियों में हास्य, व्यंग्य, गीत, शृंगार और वीर रस के विभिन्न रंग देखने को मिले। कार्यक्रम के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा और उपस्थित श्रोताओं ने कवियों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।

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