58 ग्राम पंचायतों की तकदीर बदलने का दावा करने वाला कार्यालय खुद बदहाली का शिकार
साहबों के लिए वातानुकूलित चेंबर मगर मुख्य द्वार पर प्रशासनिक उपेक्षा की परत
दुद्धी (सोनभद्र)। उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी बाहुल्य सोनभद्र जिले के दुद्धी विकास खंड कार्यालय से प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करने वाला मामला सामने आया है। क्षेत्र की 58 ग्राम पंचायतों की विकास की तस्वीर बदलने के लिए हर साल करोड़ों रुपये की योजना देने वाले ब्लॉक कार्यालय का अपना मुख्य द्वार ही विभागीय उपेक्षा का शिकार होकर बदहाली के आंसू रो रहा है। कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार के ऊपर लगा लोहे का विशालकाय पुराना बोर्ड पूरी तरह जर्जर हो चुका है। सालों से रखरखाव और पेंट न होने के कारण इस पर जंग की मोटी परत चढ़ चुकी है, जिससे इस सरकारी कार्यालय का नाम भी पढ़ पाना अब दूभर हो गया है।
विडंबना देखिए कि ग्रामीण इलाकों की सड़कों, नालियों, पंचायत भवनों और सुंदरीकरण का खाका खींचने वाले खंड विकास अधिकारी समेत तमाम आला अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि रोजाना इसी जर्जर गेट के नीचे से गुजरकर अपने वातानुकूलित (एसी) कार्यालयों में बैठते हैं। करोड़ों के बजट को पास करने वाली कलम चलाने वाले इन अधिकारियों की नजर अपने ही दफ्तर के माथे पर लगे इस कलंक पर नहीं पड़ती। कार्यालय परिसर के बाहर की दीवारों और मुख्य द्वारों पर बड़े-बड़े राजनेताओं और जनप्रतिनियों के होर्डिंग्स-बैनर तो चमक रहे हैं, लेकिन जिस बोर्ड से संस्थान की पहचान होती है, उसे जंग खाने के लिए छोड़ दिया गया है।
ब्लॉक मुख्यालय की इस घोर उपेक्षा को लेकर अखिल भारतीय आदिवासी महासंघ के जिलाध्यक्ष फौदार सिंह परस्ते,विजय सिंह ओईके, सुरेंदर पोया, सबिन्द चेरो सहित स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। दफ्तर में अपने कार्यों के लिए आने वाले ग्रामीणों का कहना है कि विभाग और अधिकारी अपने खुद के दफ्तर के मुख्य बोर्ड का जीर्णोद्धार नहीं करा पा रहे हैं, वे सुदूर वनांचल में बसे 58 गांवों का विकास किस प्रकार और किस गुणवत्ता के साथ कर रहे होंगे, इसका अंदाजा इस मुख्य द्वार को देखकर ही लगाया जा सकता है।
