आलापुर, अंबेडकर नगर। (लालमणि गोड़) विजयादशमी पर्व पर अत्यंत फलदायी है शमी वृक्ष की पूजा हिन्दू धार्मिक मान्यता है कि शमी पूजन से जीवन में आने वाले विघ्न दूर होते हैं साथ ही सुख-समृद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान श्रीराम की पूजा- अर्चना के साथ शमी वृक्ष की पूजा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शमी वृक्ष की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

हिंदू धर्मग्रंथों और परंपराओं में शमी वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष के दर्शन और पूजन से सौभाग्य में वृद्धि होती है। शमी को भगवान शिव से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि दशहरे के अवसर पर अनेक स्थानों पर श्रद्धालु शमी वृक्ष की पूजा करते हैं। शमी पूजन की क्या है विधि?

धार्मिक परंपरा के अनुसार, विजयादशमी के दिन सुबह स्नान के बाद शमी वृक्ष के पास जाकर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है। वृक्ष की जड़ में जल अर्पित कर धूप-दीप जलाया जाता है। इसके बाद पुष्प, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-शांति तथा सफलता की कामना की जाती है। पूजा के दौरान भगवान से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और विजय प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है।धार्मिक मान्यताओं में शमी वृक्ष का संबंध शनिदेव से भी माना गया है। कहा जाता है कि शमी के पत्तों और टहनियों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए किए जाते हैं इससे शनि दोष दूर होता है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक परंपराएं हैं।विजयादशमी के दिन शमी पूजन का संदेश केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में धैर्य संयम और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा भी देता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु शमी वृक्ष की पूजा कर सुख, शांति, समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं और पक्षियों में नीलकंठ का दर्शन करने की मान्यता है।
