सोनभद्र में साफ-सफाई, फॉगिंग और जागरूकता अभियान में तेजी लाने के निर्देश; 144 वार्डों में से सिर्फ 50 में हुई फॉगिंग
सोनभद्र। जनपद में संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने की चुनौती बनी हुई है। एक अक्टूबर से शुरू अभियान में 13 अक्टूबर तक कई महत्वपूर्ण कार्य आधे लक्ष्य तक भी नहीं पहुंच सके हैं। शहरी क्षेत्रों के 144 वार्डों में फॉगिंग के लक्ष्य के सापेक्ष महज 50 वार्डों में ही यह कार्य कराया गया है। वहीं, विद्यालयों में जागरूकता रैली, ग्राम स्तर पर प्रभात फेरी और ग्राम सभा बैठकों की प्रगति भी अपेक्षाकृत धीमी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर हाई-रिस्क गांवों में माइक्रो प्लान के तहत विशेष साफ-सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत झाड़ियों की कटाई, नालियों की सफाई, खराब हैंडपंपों की मरम्मत तथा बुखार, कुष्ठ, फाइलेरिया और टीबी के मरीजों के चिह्नीकरण पर जोर दिया जा रहा है। जबकि जागरूकता गतिविधियों में भी लक्ष्य अधूरे होने के सापेक्ष जागरूकता को गति देने के लिए निर्देश दिये गये। 13 अक्टूबर तक विद्यालयों में 2,075 जागरूकता रैलियों के लक्ष्य के सापेक्ष 603 रैलियां आयोजित हुईं। ग्राम स्तर पर 621 प्रभात फेरियों के लक्ष्य के मुकाबले 272 तथा 621 ग्राम सभा बैठकों के सापेक्ष 271 बैठकें ही हो सकीं। झाड़ियों की कटाई के 4,204 निर्धारित स्थलों में से 1,651 पर काम पूरा हुआ है। हैंडपंप मरम्मत के 2,890 के लक्ष्य के सापेक्ष 1,220 हैंडपंपों की मरम्मत हुई, जबकि 1,184 चबूतरों में से 481 की मरम्मत पूरी हुई है। शौचालय निर्माण के 615 के लक्ष्य के मुकाबले 292 शौचालय बनाए गए हैं। इसके साथ ही नालियों की सफाई और कृंतक नियंत्रण पर जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में 1,889 के लक्ष्य के सापेक्ष 774 नालियों की तलीझाड़ सफाई हुई, जबकि शहरी क्षेत्रों में 1,440 के मुकाबले 505 नालियों की सफाई कराई गई। सूअर पालकों को जागरूक करने के 255 के लक्ष्य के सापेक्ष 122 पालकों का संवेदीकरण किया गया। वहीं, कृंतक नियंत्रण के लिए 621 गोष्ठियों के लक्ष्य के मुकाबले 250 गोष्ठियां आयोजित हुईं। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य एवं संबंधित विभागों को अभियान में तेजी लाने और निर्धारित समय में शेष लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। साफ-सफाई, फॉगिंग, जन-जागरूकता और रोगियों के चिह्नीकरण के साथ ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
