विशेश्वर दयाल ने 200 वर्ष पूर्व शुरू कराया था अहरौरा में रामलीला
अहरौरा, मिर्जापुर। अहरौरा धर्म सभा द्वारा आयोजित 200 वर्ष पुरानी रामलीला का शुभारंभ रविवार की रात नगर पालिका क्षेत्र के गोला सहुवाइन में मुकुट पूजन के साथ शुरू हुआ। आज के दो सौ वर्ष पूर्व प्राकृतिक जड़ी बूटियो मेवा गोंद तथा अलौह वस्तुओं की व्यापारिक मंडी रही अहरौरा की धरती पर रामनगर की अतिप्राचीन रामलीला के साथ ही लगभग 200 वर्ष पूर्व साहू विशेश्वर दयाल ने शुरुवात की थी।
अहरौरा धर्म सभा द्वारा आयोजित रामलीला के संरक्षक शुभेंद्र जायसवाल ने बताया की पहले रामलीला रामनगर के पास स्थित छोटा मिर्जापुर में होती थी जहां काशी नरेश महाराज चेत सिंह तथा उनके तत्कालिन खजांची रहें साहू विश्वेश्वर दयाल राम लीला मे कलाकारों की अद्भुत प्रस्तुति देखने जाया करते थे उस समय इनके आगमन पर ही रामलीला का मंचन शुरू किया जाता था । परंतु दुर्भाग्य से एक दिन विलंब हो गया उनका इंतजार नहीं किया गया और इन लोगों की अनुपस्थिति में रामलीला का मंचन करा दिया गया इस बात की ठेस महाराज चेतसिंह तथा उनके खजांची साहू विश्वेश्वर दयाल को लगी उसी के बाद रामनगर की प्रसिद्ध रामलीला तथा अहरौरा के पोखरा सहुवाइन पर रामलीला का मंचन एक साथ शुरू कराया गया ।
अब इस रामलीला का मंचन साहू विशेश्वर दयाल के प्राचीन सहुवाइन के गोले में किया जाता है। समय के साथ रामलीला के कुशल निर्देशन का दायित्व अहरौरा धर्म सभा को सौंप दिया गया। लेकिन आज भी रावण वध तथा प्रसिद्ध नक्कटैया की लीला पोखरा सहुवाइन पर ही होती है ।रविवार शाम 8 बजे से गोला साहुवाईंनं में रामलीला का शुभारंभ मुकुट पूजन के साथ हुआ इसके बाद नारद मोह का मंचन किया गया। इस अवसर पर शुभेन्द्र जायसवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
