डिजिटल फ्रॉड, एआई-इनेबल्ड रिस्क और जिम्मेदार डिजिटल सिटिजनशिप पर केंद्रित रहा साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम
नवा रायपुर | उभरते साइबर खतरों के प्रति जन-जागरूकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू), नवा रायपुर के सेंटर फॉर इंटरनेट गवर्नेंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (CIGAI) ने छत्तीसगढ़ पुलिस के सहयोग से 24 सितम्बर 2026 को “डिफेंडिंग द डिजिटल फ्रंटियर – ए साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्राइमर” कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ पुलिस के राज्यव्यापी “साइबर जागृति अभियान” के तहत आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों और पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान साइबर क्राइम के तेजी से बदलते स्वरूप, ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड, महिलाओं और संवेदनशील वर्गों को प्रभावित करने वाली साइबर सिक्योरिटी चुनौतियों तथा डिजिटल युग में उभर रही कानूनी चुनौतियों पर चर्चा की गई।
“साइबर सिक्योरिटी की शुरुआत अवेयरनेस से होती है, लेकिन यह तभी प्रभावी बनती है, जब अवेयरनेस जिम्मेदार डिजिटल बिहेवियर में बदल जाए।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गजेंद्र यादव, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, ने साइबर अपराधियों के बदलते मोडस ऑपरेंडी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर रिश्तेदारों या परिचित व्यक्तियों की पहचान बताकर फर्जी कॉल जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसी कम्युनिकेशन का जवाब जल्दबाजी में न देने की सलाह दी और उन्हें “डिजिटल सेफ्टी एम्बेसडर” बनने का आह्वान किया, ताकि वे अपने परिवार, मित्रों और समुदायों तक साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस पहुंचा सकें।
प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन, वाइस चांसलर, एचएनएलयू, ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी अब केवल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र तक सीमित विषय नहीं रह गया है, बल्कि डिजिटल युग में रिस्पॉन्सिबल सिटिजनशिप का एक आवश्यक हिस्सा बन चुका है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनजान लिंक्स एक्सेस करते समय, अनसॉलिसिटेड कम्युनिकेशन का जवाब देते समय तथा पर्सनल या सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन शेयर करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की परिवर्तनकारी संभावनाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और कहा कि इन्हीं टेक्नोलॉजीज़ का दुरुपयोग साइबर क्राइम के अधिक जटिल रूपों को विकसित करने में भी किया जा सकता है। उन्होंने उभरती टेक्नोलॉजीज़ के साथ इन्फॉर्म्ड, रिस्पॉन्सिबल और सिक्योर एंगेजमेंट की संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया।
“साइबर क्राइम के खिलाफ पहला फायरवॉल केवल टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि अवेयरनेस, विजिलेंस और जिम्मेदार मानवीय व्यवहार है।”
सुश्री श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, IPS, पुलिस अधीक्षक, रायपुर ग्रामीण, ने कहा कि साइबर क्राइम के खिलाफ अवेयरनेस और विजिलेंस पहली सुरक्षा पंक्ति हैं। उन्होंने युवाओं से साइबर फ्रॉड के वार्निंग सिग्नल्स को पहचानने, सेफ डिजिटल प्रैक्टिसेज़ अपनाने और किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन या साइबर इंसिडेंट की तत्काल रिपोर्ट करने का आग्रह किया।
डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार (I/C), एचएनएलयू, ने निरंतर साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटीज़ की महत्वपूर्ण भूमिका ऐसे डिजिटली रिस्पॉन्सिबल सिटिजन्स तैयार करने में है, जो तेजी से इंटरकनेक्टेड हो रहे टेक्नोलॉजिकल एनवायरनमेंट में सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ सकें। कार्यक्रम में विमेन एंड साइबर सिक्योरिटी, ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड्स, भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत साइबर क्राइम्स तथा साइबरस्पेस में उभरती कानूनी चुनौतियों पर केंद्रित टेक्निकल सेशंस आयोजित किए गए। इन सेशंस के माध्यम से कानूनी समझ को साइबर अपराधों की रोकथाम, सतर्कता और प्रभावी प्रतिक्रिया से जुड़े व्यावहारिक उपायों के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. अतुल जायभाय, प्रोग्राम डायरेक्टर, द्वारा प्रस्तुत वोट ऑफ थैंक्स के साथ हुआ। उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस, यूनिवर्सिटी प्रशासन, वक्ताओं, फैकल्टी सदस्यों और विद्यार्थियों के सहयोग एवं सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। इस पहल ने लीगल लिटरेसी, रिस्पॉन्सिबल टेक्नोलॉजी यूज़ और इन्फॉर्म्ड डिजिटल सिटिजनशिप को बढ़ावा देने के प्रति एचएनएलयू की प्रतिबद्धता को दोहराया। साथ ही, यह पहल छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के व्यापक उद्देश्यों में भी योगदान देती है।
मुख्य संदेश
“डिफेंडिंग द डिजिटल फ्रंटियर” ने कानून, टेक्नोलॉजी और पब्लिक अवेयरनेस को एक साझा मंच पर लाते हुए डिजिटल युग की एक महत्वपूर्ण चुनौती पर ध्यान केंद्रित किया—ऐसी डिजिटल दुनिया का निर्माण, जिसमें हम कनेक्टेड, इनोवेटिव और डिजिटल रूप से एम्पावर्ड बने रहें, लेकिन अपनी सेफ्टी, सिक्योरिटी और जिम्मेदारी से समझौता न करें। एचएनएलयू के बारे में
2003 में स्थापित हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नवा रायपुर, एक प्रमुख नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी है, जो लीगल एजुकेशन, रिसर्च और पब्लिक एंगेजमेंट में उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध है। अपने अकादमिक प्रोग्राम्स, रिसर्च सेंटर्स और इंटरडिसिप्लिनरी इनिशिएटिव्स के माध्यम से एचएनएलयू कानून, टेक्नोलॉजी, गवर्नेंस और समाज के अंतर्संबंधों से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर निरंतर कार्य कर रहा है।
