धारा 150 रेलवे एक्ट के तहत कठोरतम कार्रवाई शुरू
धारा 150 रेलवे अधिनियम के तहत सख्त सजा का प्रावधान: दोषी को आजीवन कारावास या कम से कम 10 वर्ष तक की कठोर कैद की सजा का स्पष्ट प्रावधान
प्रयागराज । 24 अगस्त 2026 की रात्रि जसरा-मदरहा (प्रयागराज-मुंबई रेल मार्ग) के मध्य ट्रेन संख्या 15231 (बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस) के संचालन को प्रभावित करने तथा सिग्नल की ग्रीन लाइट को काले पॉलीथीन से ढकने के मामले में रेलवे सुरक्षा बल एवं स्थानीय पुलिस की संयुक्त सतर्कता से बड़ा रेल हादसा टल गया था।
पूर्व में आरपीएफ द्वारा प्राथमिक कार्रवाई करते हुए मुकदमा अपराध संख्या 451/2026 धारा 153, 174 सी, 147 रेलवे एक्ट पंजीकृत कर तीन अभियुक्तों संगीत नाथ (19 वर्ष) निवासी जज्जी पुरवा, थाना बारा, प्रयागराज, राजन (21 वर्ष) निवासी काशीराम कॉलोनी, जिला रायबरेली, माहिल (18 वर्ष) निवासी जज्जी पुरवा, थाना बारा, प्रयागराज को गिरफ्तार किया गया था। ये तीनों अभियुक्त वर्तमान में बांदा जेल में निरुद्ध हैं। मामले की संवेदनशीलता, यात्रियों की सुरक्षा तथा किसी बड़ी साजिश या रेल दुर्घटना के खतरे को ध्यान में रखते हुए अब इस मामले की विवेचना सिविल पुलिस थाना बारा को स्थानांतरित कर दी गई है और थाना बारा में मुकदमा धारा 150 रेलवे अधिनियम (Railway Act, 1989) के तहत दर्ज कर लिया गया है।
अत्यंत गंभीर एवं गैर-जमानती अपराध: धारा 150 रेलवे अधिनियम रेलवे ट्रैक, सिग्नल या ट्रेन में ऐसा कोई कार्य करने पर लागू होती है, जिससे ट्रेन के पलटने, यात्रियों के जीवन को खतरे में डालने या रेल दुर्घटना कारित होने की संभावना होती है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास या कम से कम 10 वर्ष तक की कठोर कैद की सजा का स्पष्ट प्रावधान है। यदि इस प्रकार की छेड़छाड़ या दुर्भावनापूर्ण कृत्य के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो कानून में मृत्युदंड का भी प्रावधान है।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रेल संपत्ति, सिग्नलिंग सिस्टम या रेल पटरियों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़, चाहे वह चोरी या लूट के इरादे से ही क्यों न की गई हो, देश विरोधी व जन-सुरक्षा के खिलाफ गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे असामाजिक एवं आपराधिक तत्वों के खिलाफ भविष्य में भी रेलवे एक्ट की धारा 150 जैसी अत्यंत सख्त एवं गैर-जमानती धाराओं के तहत कठोरतम कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
