मनोज पाण्डेय
प्रयागराज। झूंसी, वैश्विक हिंदी महासभा, अखिल भारतीय हिंदी परिषद की ओर से ‘ हिंदी दिवस की सार्थकता ‘ विषय पर डॉ० विजयानन्द की अध्यक्षता एवं डॉ०अमिताभ त्रिपाठी के मुख्यआतिथ्य में संगोष्ठी और डॉ०शंभूनाथ त्रिपाठी ‘अंशुल’ की अध्यक्षता, डॉ०अरविंद कुमार श्रीवास्तव के संयोजन एवं गंगा प्रसाद त्रिपाठी मासूम के संचालन में कवि सम्मेलन संजीवनी सेवालय, झूंसी में आयोजित हुआ।
प्रथम सत्र का विषय प्रर्वतन करते हुए डॉ० रविकुमार मिश्र ने कहा- हिन्दी बहुत ही सरल,सुबोध तथा हृदयग्राही है वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ०शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल ने बताया कि हिंदी, संस्कृत की पुत्री है, इसमें भारत की राष्ट्रभाषा बनने की क्षमता है। मुख्य वक्ता अभय नारायण तिवारी ने कार्यालयी राजभाषा हिंदी पर अपना व्याख्यान दिया।
मुख्य अतिथि डॉ० अमिताभ त्रिपाठी ने अपने अनुभवों के आधार पर हिंदी दिवस की सार्थकता को सिद्ध किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में साहित्यकार डॉ ०विजयानन्द ने कहा कि जब तक हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं बन जाती, तब तक हिन्दी दिवस कलंकित है।
दूसरे सत्र में काव्य समारोह का शुभारम्भ करते हुए स्वागताध्यक्ष डॉ० अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना के उपरांत अपनी दो रोचक कविताएं प्रस्तुत की मुख्य अतिथि अमिताभ त्रिपाठी, अध्यक्ष डॉ०शंभूनाथ त्रिपाठी अंशुल, विशेष अतिथि राकेश मालवीय मुस्कान, डॉ०रविकुमार मिश्र,सुनील यादव यथार्थवादी, शैलेंद्र चौधरी, अंबुज उषा नंदन आदि ने अपनी कविताएं पढ़ी कुशल संचालक गंगा प्रसाद त्रिपाठी मासूम ने अपने गीतों वातावरण को सुगंधित कर दिया सभाकक्ष तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम को सर्वश्री अभय नारायण तिवारी, ज्योतिशंकर चौबे ,देवराज शुक्ल, प्रमोद बरार, डॉ० कौशलेंद्र सिंह,संजय त्रिपाठी अनूप मिश्र, रेखा ,माधुरी, विजय आदि ने अपनी उपस्थिति से गौरवान्वित किया।
