हाथशिल्प से विरासत तक: NMACC का ‘स्वदेश’ पवेलियन भारतीय कला-विरासत को दे रहा नई पहचान

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मुंबई: नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में रिलायंस फाउंडेशन की पहल ‘स्वदेश’ पवेलियन भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा परंपराओं को आधुनिक मंच प्रदान कर रहा है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों के कुशल कारीगर अपनी पारंपरिक कला का प्रत्यक्ष प्रदर्शन करते हैं। NMACC के कॉन्कोर्स में सात पवेलियन के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों की कला प्रदर्शित की जा रही है। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की जरदोजी, तेलंगाना व राजस्थान के दंक पोल्की आभूषण, राजस्थान की पिछवाई चित्रकला, बनारसी बुनाई, कश्मीर की काल बाफ़ी कालीन व सोज़नी कढ़ाई तथा ओडिशा-तेलंगाना की चांदी की फिलिग्री कला शामिल हैं।

‘स्वदेश’ की खासियत यह है कि आगंतुक कारीगरों को काम करते हुए देख सकते हैं और उनसे सीधे संवाद कर उनकी पीढ़ियों से चली आ रही तकनीक और ज्ञान को समझ सकते हैं। चांदी की महीन तारकशी से लेकर बनारसी साड़ी की जटिल बुनाई तक, हर कला अपने पीछे धैर्य, कौशल और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की कहानी समेटे हुए है। यह मंच पारंपरिक और विलुप्तप्राय होती कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ कारीगरों को व्यापक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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