वाराणसी/ पेपर लीक पर जवाबदेही और समान शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर साझा संस्कृति मंच ने आज शास्त्री घाट वरुणापुल, वाराणसी पर किया एक दिवसीय अनशन किया और अपनी मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन पत्र नगर मर्जिस्टेट को दिया गया। वाराणसी में साझा संस्कृति मंच द्वारा आज 19 जुलाई को शास्त्री घाट, वरुणापुल पर सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक एक दिवसीय उपवास और प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन पत्र देने का कार्यक्रमआयोजित किया गया। यह कार्यक्रम किसी के समर्थन मात्र का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने और छात्रों के भविष्य की रक्षा का संकल्प है।
देश की शिक्षा व्यवस्था आज गहरे संकट से गुजर रही है। लगातार हो रहे पेपर लीक, भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताएँ, सरकारी स्कूलों की उपेक्षा, शिक्षा के बढ़ते निजीकरण और महंगी होती पढ़ाई ने करोड़ों छात्रों और अभिभावकों के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। शिक्षा अब अधिकार के बजाय बाजार का सामान बनाई जा रही है, जिसका सबसे अधिक नुकसान गरीब, ग्रामीण और मेहनतकश परिवारों के बच्चों को उठाना पड़ रहा है।
इन्हीं सवालों को लेकर प्रख्यात वैज्ञानिक सोनम वांगचुक, छात्रनेता नेहा बोरा, मनीष, आमीन तथा अन्य साथी दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे। सोनम वांगचुक ने 21 दिनों तक अनशन किया, जिसके बाद बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच उन्हें पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया। वहीं नेहा, मनीष, आमीन तथा अन्य साथी अभी भी आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं और शिक्षा के सवाल पर संघर्ष जारी है। साझा संस्कृति मंच लोकतांत्रिक आंदोलनकारियों को जबरन हटाने की कार्रवाई की निंदा करता है। किसी भी लोकतंत्र में जनता की आवाज को दमन से नहीं दबाया जा सकता। सरकार को आंदोलनकारियों से संवाद करना चाहिए और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
यह आंदोलन अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI), इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) सहित अनेक छात्र-युवा संगठन, नागरिक संगठन, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न राजनीतिक दल तथा देशभर के लोकतांत्रिक समूह शिक्षा के सवाल पर जनमत तैयार कर रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में विरोध प्रदर्शन, धरना, अनशन, हस्ताक्षर अभियान और जनसभाओं के माध्यम से शिक्षा बचाने की आवाज लगातार मजबूत हो रही है। हमारा मानना है कि शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक समाज की बुनियाद होती है। यदि शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार, पेपर लीक, निजीकरण और मुनाफाखोरी के हवाले कर दी जाएगी तो देश का भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा। आज लाखों छात्र वर्षों की मेहनत के बावजूद निष्पक्ष परीक्षा और समान अवसर से वंचित हो रहे हैं। यह केवल छात्रों का संकट नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का संकट है।
हम शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा देने तथा केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार, पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर ठोस एवं पारदर्शी कार्रवाई करने की मांग करते हैं। साथ ही, सरकार को सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने, सरकारी विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में निवेश बढ़ाने तथा शिक्षा को आम आदमी की पहुंच में बनाए रखने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। साझा संस्कृति मंच सभी छात्र-युवा संगठनों, शिक्षकों, अभिभावकों, बुद्धिजीवियों, श्रमिक संगठनों, किसान संगठनों, महिला संगठनों, नागरिक समूहों और लोकतांत्रिक शक्तियों से अपील करता है कि वे इस संघर्ष को अपना संघर्ष समझें और इसे देशव्यापी जनआंदोलन का रूप दें। यह लड़ाई किसी एक संगठन, एक परीक्षा या एक व्यक्ति की नहीं है। यह देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य, समान अवसर, सामाजिक न्याय और संविधान में निहित शिक्षा के अधिकार की लड़ाई है। उपवासस्थल प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन पत्र सौंपा गया। ज्ञापन की प्रमुख मांगें –
1. NEET पेपर लीक और दर्जनों अभ्यर्थियों के सुसाइड पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल इस्तीफा दें। 2. सभी पेपर लीक एवं परीक्षा घोटालों की सर्वोच्च स्तर पर निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। 3. पेपर लीक माफिया, दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। 4. सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए तथा शिक्षा के निजीकरण पर प्रभावी रोक लगाई जाए। 5. देश के प्रत्येक छात्र को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण, समान एवं वैज्ञानिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। 6. वैज्ञानिक समाजसेवी सोनम वांगचुक , छात्रनेता नेहा मनीष और अमीन के अनशन को देखते हुए बातचीत की प्रक्रिया तत्काल शुरू किया जाए और अनशन को सद्भावपूर्वक सहमति से खत्म कराया जाए।
उपवास कार्यक्रम में प्लेकार्ड पर मोदी सरकार होश में आओ, शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो, छात्रों के सुसाइड पर शर्म करो। नई शिक्षा नीति वापस लो “शिक्षा बचाओ – भविष्य बचाओ”, “पेपर लीक बंद करो – छात्रों को न्याय दो”, “शिक्षा सबका अधिकार है, व्यापार नहीं। आदि नारे लिखे थे।आज के उपवास कार्यक्रम में मुख्य रूप से नंदलाल मास्टर, रामजनम यादव, फादर आनंद, नीति भाई , डॉ धनंजय त्रिपाठी, जागृति राही, ऐड अबू हाशिम, ऐड अब्दुल्लाह, ज्योति गुप्ता, डॉ अनूप श्रमिक, एकता शेखर , अनुराग , फादर दयाकर, सोनी , अरुण माहेश्वरी, अनिता, महेंद्र, अब्दुल्लाह खान , कन्हैया, रूमान, मनोज, बागी प्रमोद, गजराज पटेल, रंजीत राजभर, आदित्य पाल, शिवानी, फादर जीतेश, फादर अनुज, सिस्टर फ्लोरीन, सिस्टर अर्चना, ग्रेस, बेन्सिटा, आर्यमान, इरीना, सानिया, रवि शेखर, आजाद गौतम, महेंद्र राठौर, अनीता, सोनू, आशा इत्यादि शामिल रहे।
