सेल-बोकारो इस्पात संयंत्र ने डी-कार्बोनाइजेशन की दिशा में बढ़ाया महत्वपूर्ण कदम, जीएचजी डैशबोर्ड का शुभारंभ

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बोकारो। सतत इस्पात उत्पादन एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सेल के बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) ने 17 जुलाई को अत्याधुनिक ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) डैशबोर्ड का शुभारंभ किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म संयंत्र के विभिन्न उत्पादन इकाइयों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन की निगरानी, विश्लेषण एवं प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस डैशबोर्ड का शुभारंभ बोकारो इस्पात संयंत्र के निदेशक प्रभारी ने किया। इस अवसर पर सेल पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग के अधिशासी निदेशक सहित बीएसएल के सभी अधिशासी निदेशक, अन्य वरीय अधिकारी तथा तकनीकी सहयोगी संस्था सेंट्रा वर्ल्ड, बेंगलुरु के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

प्रारंभ में मुख्य महाप्रबंधक (पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास) ने बताया कि यह पहल बोकारो इस्पात संयंत्र की डी-कार्बोनाइजेशन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि ईआरपी/एसएपी आधारित यह डैशबोर्ड संयंत्र की प्रमुख उत्पादन इकाइयों—सिंटर प्लांट, कोक ओवन, ब्लास्ट फर्नेस, स्टील मेल्टिंग शॉप तथा रोलिंग मिलों—से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग वास्तविक समय (Near Real-Time) में विश्लेषण एवं निगरानी करेगा। साथ ही यह उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायक होगा। यह डैशबोर्ड एम/एस सेंट्रा वर्ल्ड, बेंगलुरु द्वारा बोकारो इस्पात संयंत्र की तकनीकी समिति एवं सेल के पर्यावरण प्रबंधन प्रभाग, कोलकाता के सहयोग से विकसित किया गया है। इसमें जीएचजी प्रोटोकॉल, वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन की कार्यप्रणाली, कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) तथा कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों का उपयोग किया गया है। यह प्रणाली ईआरपी/एसएपी से प्रतिदिन उत्पादन संबंधी आंकड़े स्वतः प्राप्त कर संयंत्र के कार्बन फुटप्रिंट का सटीक आकलन करती है।

इस अवसर पर निदेशक प्रभारी ने कहा कि डिजिटल तकनीकों का प्रभावी उपयोग बोकारो इस्पात संयंत्र की पर्यावरणीय उत्कृष्टता तथा डी-कार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस परियोजना को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विभागों एवं टीमों की सराहना की। जीएचजी डैशबोर्ड का शुभारंभ बोकारो इस्पात संयंत्र की हरित एवं सतत इस्पात उत्पादन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो सेल की दीर्घकालिक सतत विकास रणनीति तथा भारत के जलवायु लक्ष्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करेगा।

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