लखनऊः मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आज नेशनल आयुष मिशन-उत्तर प्रदेश की 12वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्ष 2026-27 की राज्य वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया तथा आयुष सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रमुख सचिव आयुष एवं मिशन निदेशक परियोजनाओं की प्रत्येक माह समीक्षा करें तथा समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण हों।
उन्होंने निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों के समानांतर आवश्यक पदों के सृजन की प्रक्रिया भी पूरी की जाए,ताकि भवन तैयार होते ही मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का संचालन बिना किसी विलंब के प्रारंभ किया जा सके।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में आयुष चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रदेश में पहले से संचालित आयुष डिस्पेंसरी, अस्पताल एवं आरोग्य मंदिरों के उन्नयन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में स्वच्छता, हरित वातावरण एवं जनसुविधाओं को बेहतर बनाया जाए। परिसर में लैंडस्केपिंग, क्यारियों एवं हरियाली का विकास कराया जाए तथा अधिक से अधिक मरीजों को गुणवत्तापूर्ण आयुष सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए डिस्पेंसरियों की कार्यक्षमता बढ़ाई जाए।
बैठक में वर्ष 2026-27 की ₹613.42 करोड़ (₹61,341.67 लाख) की राज्य वार्षिक कार्ययोजना को गवर्निंग बॉडी द्वारा अनुमोदित किया गया, जिसे स्वीकृति हेतु भारत सरकार के आयुष मंत्रालय को भेजा जाएगा।प्रस्तावित बजट में ₹458.99 करोड़(₹45,898.65 लाख)नई गतिविधियों तथा ₹154.42 करोड़ (₹15,441.80 लाख) सतत (Ongoing) गतिविधियों पर व्यय किए जाएंगे। इसमें आयुष सेवाएं, फ्लेक्सी पूल, आयुष शिक्षण संस्थान तथा प्रशासनिक व्यय शामिल हैं।
कार्ययोजना के अंतर्गत 23 नए आयुष मेडिकल यूनिट स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, वाराणसी में लगभग ₹1.78 करोड़ की लागत से छात्राओं के लिए द्वितीय तल छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। प्रदेश के 17 आयुष कॉलेजों में 51 स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग ₹3.03 करोड़ व्यय किए जाएंगे। साथ ही झांसी एवं शाहजहांपुर में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का निर्माण तथा नई आयुष डिस्पेंसरियों की स्थापना भी प्रस्तावित है।
बैठक में प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत लखीमपुर खीरी में संचालित पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के माध्यम से वर्ष 2025-26 में 2,12,435 मरीजों की स्क्रीनिंग, परामर्श एवं रेफरल सेवाएं प्रदान की गईं।
उन्होंने बताया कि आयुष मोबाइल मेडिकल यूनिट कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के 9 आकांक्षी जिलों—बहराइच, बलरामपुर, चंदौली, चित्रकूट, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र एवं कुशीनगर—के दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। वर्ष 2025-26 में इस कार्यक्रम के तहत 19,726 मरीजों को उपचार एवं परामर्श उपलब्ध कराया गया।
ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं अन्य मस्कुलोस्केलेटल रोगों की रोकथाम एवं प्रबंधन के लिए संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत प्रदेश के आठ आयुर्वेद कॉलेजों—लखनऊ,वाराणसी,प्रयागराज,झांसी,पीलीभीत,बरेली,मुजफ्फरनगर एवं अतर्रा (बांदा)—में सेवाएं संचालित हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान इस कार्यक्रम से 37,414 मरीज लाभान्वित हुए।
इसी प्रकार ‘कारुण्य’ समेकित सहायक एवं पैलिएटिव केयर कार्यक्रम के माध्यम से जीवनशैली संबंधी रोगों, दीर्घकालिक बीमारियों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मरीजों को घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह कार्यक्रम लखनऊ, गोरखपुर, अयोध्या एवं गाजीपुर के 55 विकासखंडों में संचालित है। वर्ष 2025-26 में इसके माध्यम से 3,909 मरीजों को लाभान्वित किया गया।
बैठक में सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ0 पिंकी जोवेल,आयुष मिशन की मिशन निदेशक चैत्रा वी. सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नेशनल आयुष मिशन की 12वीं गवर्निंग बॉडी की बैठक सम्पन्न
