ज्योत्सना महिला समिति ने मनाया किड्स जोन “उल्लास” का प्रथम स्थापना दिवस

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स्क्रीन टाइम कम कर छोटी उम्र में बच्चों को दें मजबूत बुनियादी आधार:बी. के. दुर्गा

सोनभद्र,सिंगरौली।रविवार को ज्योत्सना महिला समिति द्वारा सीईटीआई परिसर स्थित किड्स जोन “उल्लास” भवन का प्रथम स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान कार्यक्रम में सीलोव्स अध्यक्षा बी.के.दुर्गा बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहीं।अपने उद्बोधन में उन्होंने किड्स ज़ोन की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह सिंगरौली में अपनी तरह की पहली पहल है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों में “Sharing is Caring” की भावना विकसित करना, उन्हें स्क्रीन से दूर रखकर सामाजिक रूप से सक्रिय बनाना तथा आपसी संवाद और सहभागिता को बढ़ावा देना है।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यूक्लियर परिवारों के बढ़ते चलन के कारण बच्चों को सामाजिक व्यवहार सीखने के अवसर कम मिलते हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए किड्स ज़ोन “उल्लास” भवन की स्थापना की गई है। साथ ही उन्होंने बच्चों के समग्र विकास के लिए आत्मविश्वास, मजबूत बुनियाद और पुस्तकों से जुड़ाव के महत्व पर बल दिया। इसके अलावा दुर्गा ने कहा कि छोटी उम्र में ही बच्चों को एक मजबूत बुनियादी आधार (स्ट्रॉन्ग फाउंडेशन) दिया जाना चाहिए। आधुनिक युग में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों के सामने मोबाइल फोन का प्रयोग करने से बचें और उन्हें किताबों से जोड़ें। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों और अभिभावकों के बीच जीवंत संवाद होना बेहद जरूरी है,जिससे बच्चों में आत्मनिर्भरता और स्वयं सीखने की प्रवृत्ति विकसित हो सके।

इस अवसर पर ज्योत्सना महिला समिति की उपाध्यक्षा नम्रता कुमार,संगीता नारायण,शीला द्विवेदी,रूबी जायसवाल एवं अन्य सदस्याएँ तथा एनसीएल मुख्यालय से अन्य अधिकारी,कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में बच्चे और अभिभावकगण उपस्थित रहे।

नन्हे-मुन्नों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और ‘वेस्ट टू आर्ट’ प्रदर्शनी ने जीता सबका दिल

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सस्वर गायन के साथ हुआ। इसके बाद किड्स जोन के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी मनमोहक और ऊर्जावान प्रस्तुतियों से वहाँ मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। बच्चों ने ‘बम बम बोले’ एवं ‘लाल टमाटर’ जैसे लोकप्रिय गीतों पर शानदार समूह नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं ‘बच्चे मन के सच्चे’ और ‘लकड़ी की काठी’ गीतों पर मधुर सामूहिक गायन की प्रस्तुति दी। इस दौरान बच्चों की रचनात्मकता की झलक भी देखने को मिली,जहाँ उनके द्वारा ‘वेस्ट टू आर्ट’ (कबाड़ से जुगाड़) के तहत बनाई गई सुंदर एवं उपयोगी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई, जिसकी सभी ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।

समारोह के दौरान वहाँ उपस्थित अभिभावकों और बच्चों ने भी मंच से किड्स जोन के साथ जुड़े अपने अनुभवों एवं सकारात्मक विचारों को साझा किया। अभिभावकों ने बताया कि किड्स ज़ोन से जुड़ने के बाद उनके बच्चों में रचनात्मकता और सृजनात्मक कौशल का विकास हुआ है। साथ ही उन्होंने नए मित्र बनाना, सामाजिक रूप से घुलना-मिलना तथा टीम भावना के साथ कार्य करना सीखा है। अभिभावकों ने यह भी कहा कि किड्स ज़ोन ने बच्चों को मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन से दूर रहकर पुस्तकों से जुड़ने की प्रेरणा दी है, जिससे उनमें पढ़ने की आदत भी विकसित हुई है।

अभिभावकों एवं बच्चों के उत्साहवर्धक अनुभवों और सकारात्मक प्रतिक्रियाओं को सुनकर किड्स ज़ोन संचालनकर्ताओं में नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार हुआ एवं उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु ऐसे प्रयास करते रहने की प्रतिबद्धता जाहिर की।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष ज्योत्सना महिला समिति द्वारा एनसीएल मुख्यालय के सीईटीआई खेल परिसर में एनसीएल परिवार के नौनिहालों के लिए इस अनूठे किड्स जोन का उद्घाटन किया गया था। इस ‘किड्स जोन’ को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को मोबाइल, गैजेट्स और वर्चुअल दुनिया के दुष्प्रभावों से दूर रखना है, ताकि खेल-कूद, रचनात्मक गतिविधियों और आपसी मेलजोल के माध्यम से उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास सही दिशा में हो सके।–

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