गिर क्षेत्र में एशियाई शेरों की बढ़ती संख्या के साथ उनके स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं – सांसद, परिमल नथवाणी

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एशियाई शेरों में CDV और बेबेसिया जैसे संक्रामक रोगों के शीघ्र निदान हेतु वनमंत्रियों से परिमल नथवाणी की अपील

नई दिल्ली। अखबारी रिपोर्टों के अनुसार गिर तथा बृहद गिर क्षेत्र में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) और बेबेसिया के कारण आठ या उससे अधिक शेरों की मृत्यु पर राज्यसभा सांसद,परिमल नथवाणी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। शेरों की मौत रोकने, संक्रमित शेरों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने तथा रोग के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा गुजरात के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

 नथवाणी ने शेरों की मृत्यु को अत्यंत चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि गिर नेशनल पार्क प्रबंधन तथा वन विभाग इस मामले में पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहे होंगे तथा शेरों की मृत्यु रोकने, संक्रमित शेरों को उपचार उपलब्ध कराने और रोग नियंत्रण के लिए दिन-रात प्रयासरत होंगे।”

अपने पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि गिर और बृहद गिर क्षेत्र में एशियाई शेरों की बढ़ती संख्या के साथ उनके स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से CDV और बेबेसिया जैसे रोग शेरों की आबादी के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। ऐसे रोगों की शीघ्र पहचान, त्वरित प्रतिक्रिया और प्रभावी नियंत्रण के लिए फील्ड स्तर पर व्यवस्थित निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने ट्रैकर्स, बीट गार्ड, राउंड स्टाफ तथा पशु चिकित्सक टीमों के लिए “फील्ड ऑब्जर्वेशन प्रोटोकॉल” लागू करने का सुझाव दिया है। साथ ही फील्ड स्टाफ द्वारा शेरों में दिखाई देने वाले असामान्य व्यवहार, शारीरिक कमजोरी, श्वसन संबंधी परेशानी, अत्यधिक टिक संक्रमण, अस्थिर चाल, दिशा भ्रम आदि लक्षणों का नियमित अवलोकन किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।

इसके अतिरिक्त,  नथवाणी ने सुझाव दिया है कि यदि किसी एक क्षेत्र में एक से अधिक शेरों में समान लक्षण दिखाई दें, तो उसे “हाई अलर्ट” माना जाए और तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों तथा वेटरनरी रैपिड रिस्पॉन्स टीम को सूचित किया जाए। प्रत्येक संदिग्ध मामले में तिथि, समय, स्थान, GPS लोकेशन, शेरों की संख्या, आयु, व्यवहार तथा फोटोग्राफिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की भी बात कही गई है। साथ ही मृत या गंभीर रूप से बीमार जानवरों के मामलों में अनधिकृत हस्तक्षेप से बचते हुए निर्धारित SOP के अनुसार ही कार्रवाई करने का सुझाव दिया गया है।

चूंकि CDV संक्रमण कुत्तों के माध्यम से फैलने की आशंका रहती है, इसलिए श्री नथवाणी ने दीर्घकालिक उपायों पर भी जोर दिया है। उन्होंने आसपास के गांवों के कुत्तों का टीकाकरण, टिक नियंत्रण कार्यक्रम, नियमित स्वास्थ्य निगरानी, त्वरित लैब जांच व्यवस्था तथा फील्ड स्टाफ के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के सुझाव भी अपने पत्र में दिए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बेबेसिया जैसी स्थिति में शेरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे CDV जैसे वायरसजनित संक्रमण अधिक गंभीर रूप धारण कर सकते हैं। इसलिए दोनों रोगों को परस्पर जुड़े जोखिम के रूप में देखते हुए समग्र रणनीति अपनाना आवश्यक है।

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