बीसीसीएल द्वारा एमएमडीआर अधिनियम के प्रावधानों के क्रियान्वयन पर एक दिवसीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

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धनबाद / सामुदायिक भवन, कोयला नगर में आज बीसीसीएल द्वारा एमएमडीआर अधिनियम के अंतर्गत हालिया अधिसूचनाओं के अनुपालन में प्रदत्त शक्तियों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु बीसीसीएल अधिकारियों एवं सीआईएसएफ कर्मियों के लिए एक-दिवसीय एक महत्वपूर्ण कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में सीएमडी बीसीसीएल, मनोज कुमार अग्रवाल ने बतौर मुख्य अतिथि अपनी सहभागिता की। इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन)  मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (तकनीकी)  संजय कुमार सिंह, वरीय सुरक्षा सलाहकार, विपुल शुक्ला, डीआईजी (सीआईएसएफ) जीतेंद्र तिवारी सहित कोयला भवन मुख्यालय के सभी महाप्रबंधकगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, सभी क्षेत्रीय महाप्रबंधक, सीआईएसएफ बीसीसीएल यूनिट, क्षेत्रीय कार्यालयों के वरीय सीआईएसएफ अधिकारी एवं कर्मी तथा सुरक्षा बल के जवान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एवं प्रशिक्षक के रूप में माननीय उच्च न्यायालय, झारखंड के वरीय अधिवक्ता अनूप कुमार मेहता तथा जिला एवं सत्र न्यायालय, धनबाद के वरीय अधिवक्ता शाहनवाज़ हुसैन उपस्थित रहे। दोनों विधि विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों के माध्यम से उपस्थित प्रतिभागियों को एमएमडीआर अधिनियम, 1957 के विभिन्न प्रावधानों एवं उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया।

प्रथम तकनीकी सत्र में  अनूप कुमार मेहता ने ‘एमएमडीआर अधिनियम, 1957 की धारा 22, 23बी एवं 24 के अंतर्गत जारी अधिसूचनाओं के आलोक में अवैध खनन एवं कोयला चोरी पर नियंत्रण के सुदृढ़ उपाय’ विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने अधिनियम से संबंधित प्रमुख प्रावधानों, विधिक परिभाषाओं, प्रक्रियात्मक पहलुओं तथा प्रवर्तन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार इन प्रावधानों का प्रभावी उपयोग कर अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकता है तथा संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय को और सुदृढ़ किया जा सकता है।

द्वितीय तकनीकी सत्र में  शाहनवाज़ हुसैन ने ‘एमएमडीआर अधिनियम, 1957 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का क्रियान्वयन’ विषय पर प्रतिभागियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने अधिनियम के अंतर्गत अधिकारियों को प्राप्त शक्तियों, उनके विधिक दायरे, क्रियान्वयन की प्रक्रिया तथा व्यवहारिक चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इन प्रावधानों के प्रभावी अनुपालन हेतु विधिक समझ, समन्वित प्रयास एवं जवाबदेही की भावना आवश्यक तथा महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान, कोल इंडिया गीत तथा अतिथियों के औपचारिक स्वागत के साथ की गई। स्वागत संबोधन निदेशक (तकनीकी/संचालन) संजय कुमार सिंह ने किया और कार्यक्रम के उद्देश्य, महत्व एवं आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन अवैध खनन एवं खदानों की सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों एवं सुरक्षा बलों को विधिक प्रावधानों की समुचित समझ प्रदान करते हैं, जिससे वे अपने दायित्वों का निर्वहन अधिक प्रभावी ढंग से कर सकें। उन्होंने बीसीसीएल एवं सीआईएसएफ के बीच बेहतर समन्वय, सतर्कता एवं त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे संगठन की परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि विधायी प्रावधानों की बेहतर समझ एवं प्रशासनिक दक्षता के समन्वय से ही अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, और इस दिशा में सभी संबंधित पक्षों को सक्रिय एवं जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी। समापन सत्र में उपस्थित सभी प्रतिभागियों एवं प्रशिक्षकों के बीच एक संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें सीआईएसएफ एवं बीसीसीएल अधिकारियों ने अधिनियम से संबंधित अपने प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं को साझा किया तथा विशेषज्ञों से उनके समाधान प्राप्त किए। सत्र का समापन कंपनी के वरीय सुरक्षा सलाहकार विपुल शुक्ला के समापन संबोधन से हुआ। मंच संचालन विभागाध्यक्ष (विधि) डॉ. कुमार शरत सिन्हा ने किया। 

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